यह पूरा मामला तब खुला जब महज 18 से 20 हजार रुपये महीना कमाने वाले इन कर्मचारियों की करोड़ों रुपये की संपत्तियों का पता चला. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
अखिलेश यादव के ट्वीट से गरमाया माहौल
यह पूरा विवाद तब चर्चा का विषय बन गया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया. अखिलेश यादव ने इस मामले में सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए लिखा कि इस षड्यंत्र की जड़ें ज्यादा दूर नहीं हैं और दोषियों को पकड़ने के लिए पुलिस को ज्यादा भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने पुलिस की मदद करने की बात भी कही. विपक्ष के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई.
सैलरी और संपत्ति के बीच का बड़ा फासला
जांच एजेंसियों के रडार पर आए दोनों कर्मचारियों की मंथली सैलरी भी काफी कम है. शुरुआती जांच में सामने आया कि इनमें से एक कर्मचारी ने करीब 1.5 करोड़ रुपये की कीमती जमीन खरीदी थी, जबकि दूसरे कर्मचारी ने करीब 40 लाख रुपये का एक बड़ा प्लॉट अपने नाम किया था. इतनी कम आय में इतनी महंगी संपत्तियां खरीदने की बात जैसे ही सामने आई, जांच एजेंसियों का शक यकीन में बदल गया.
गोबर के ढेर में छिपा मिला कैश
इस मामले में सबसे पहला और प्रमुख नाम लवकुश मिश्रा का सामने आया है, जो अयोध्या के रुदौली क्षेत्र के मीनापुर फगौली गांव का रहने वाला है. लवकुश राम मंदिर में दानपात्रों से नकदी निकालने और उसे गिनने के काम में तैनात था. जब पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने उसके पैतृक घर पर छापेमारी की तो वहां का नजारा देखकर सब हैरान रह गए.
जांच टीम को लवकुश के घर से कुल 10 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई. इसमें से कुछ रकम अलमारी में बेहद सलीके से रखी गई थी, जबकि कुछ कैश को घर के पीछे गोबर के ढेर में छिपाकर रखा गया था. ग्रामीणों के अनुसार, राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद से लवकुश की जीवनशैली में अचानक बड़ा बदलाव आया था.
‘बेटा पूरी तरह निर्दोष’
दूसरी ओर, लवकुश के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने घर से 10 लाख रुपये मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन दावा किया कि यह पैसा उन्होंने अपनी खेती की जमीन को गिरवी रखकर जुटाया था. उन्होंने यह भी कहा कि फैजाबाद में बन रहे नए मकान से उनके बेटे का कोई वित्तीय संबंध नहीं है.
एसओजी ने हिरासत में लिया
फिलहाल, एसओजी ने लवकुश मिश्रा समेत एक अन्य संदिग्ध कर्मचारी को हिरासत में ले लिया है. पुलिस टीम मंदिर परिसर के पिछले कई हफ्तों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाल रही है ताकि यह समझा जा सके कि पैसों की गिनती के दौरान हेराफेरी को अंजाम कैसे दिया जाता था. इसके साथ ही मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड्स और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच भी की जा रही है.
एसआईटी करेगी जांच
मामले के तूल पकड़ने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया था. सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए लखनऊ के मंडलायुक्त (IAS) विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है. इस टीम में आईपीएस (IPS) अधिकारी किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं. इस समिति को 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर पूरी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी.
नेताओं और ट्रस्ट में भारी आक्रोश
वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की आस्था, त्याग और लंबे संघर्ष का प्रतीक है. इसके साथ किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों से मिलकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है.
वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच के लिए ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अस्थायी रूप से अपने पदों को छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी है.
उधर, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भरोसा दिलाया है कि श्रद्धालुओं की आस्था और उनके दान के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होगी.
