उत्तर प्रदेश के बरेली पुलिस ने 2 दिन पहले डेढ़ साल के मासूम ऋषभ की सकुशल बरामदगी के बाद अब पूरे बच्चा चोर गैंग का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है. ये गिरोह बच्चा चोरी के बाद उसे दिल्ली मुंबई जैसी बड़ी-बड़ी जगह पर 5 से 10 लाख रुपए में निसंतान रईस दंपति को बेचता था.

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इस गैंग का सरगना पश्चिम बंगाल का रहने वाला एक डॉक्टर था, जो अपने साथी डॉक्टर और नर्स की मदद से इस गैंग को संचालित कर रहा था.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

आईपीएस अंशिका वर्मा खुद ग्राहक बनकर पहुंचीं डॉक्टर के पास
आईपीएस अधिकारी अंशिका वर्मा मासूम ऋषभ को अपहरण करने वाले अपहरणकर्ताओं से पूछताछ के बाद खुद ग्राहक बनकर गैंग के मास्टरमाइंड के करीब पहुंच गईं और खुद के लिए एक बच्चे की चाहत की बात कर डॉक्टर से बच्चे को लेने का सौदा पक्का कर लिया. जैसे ही डॉक्टर ने रकम को हाथ लगाया अंशिका वर्मा ने सिंघम रूप दिखाया और बिल्डिंग के बाहर मौजूद महिला एसओजी टीम ने मौके से एक महिला नर्स समेत दो डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया. जो अब तक कई बच्चों को चोरी करके मोटी रकम लेकर बिक्री कर चुके हैं. फिलहाल पुलिस अब लिखा पढ़ी के बाद गिरफ्तार बच्चा चोर गिरोह के सभी सदस्यों को जेल भेजने की तैयारी कर रही है.

गैंग का सरगना निकला पश्चिम बंदाल का डॉक्टर
इस बच्चा चोर गिरोह का सरगना पश्चिम बंगाल के नादिया जिला का रहने वाला डॉ संजय कुमार है. डॉक्टर संजय कुमार खीरी लखीमपुर जिला के रहने वाले अपने साथी डॉक्टर केशव राम उर्फ मंजेश और बदायूं जिला की रहने वाली नर्स सीता के साथ मिलकर एक अबॉर्शन और एडॉप्शन सेंटर चला रहे थे. दरअसल. बीती 24 मई को बरेली जिला के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मनोना धाम से डेढ़ साल के मासूम ऋषभ का अपहरण कर लिया गया था. दो दिन पहले बरेली की महिला एसओजी टीम ने आईपीएस अधिकारी अंशिका वर्मा के नेतृत्व में मुठभेड़ के बाद बदमाश योगेश और पवन चंदेल से अपहृत मासूम ऋषभ को बरामद कर लिया था.

मुठभेड़ में पकड़े गए बदमाशों से हुआ खुलासा
मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार दोनों बदमाशो योगेश कनौजिया और पवन चंदेल से बरेली में एसपी अंशिका वर्मा ने पूछताछ की तो बड़ा खुलासा हुआ. यह दोनों बदमाश अपने साथी उत्तम कुमार के साथ डॉक्टर संजय कुमार के बच्चा चोर गिरोह के लिए काम करते थे. जो बरेली के ही नामी गिरामी अस्पतालों से, मेला या भीड़भाड़ वाले इलाकों और धार्मिक स्थलों से मासूम बच्चों को अपहरण या फिर चोरी कर लेते थे और अपहरण या चोरी किए गए मासूम बच्चों को डॉक्टर संजय कुमार के अबॉर्शन और एडॉप्शन केंद्र में लाकर बिक्री कर देते थे.

रईस निसंतान दंपति को बेचते थे बच्चा
इसके बाद डॉ संजय कुमार अपने साथी केशव राम और नर्स सीता के साथ मिलकर अपहरण या फिर चोरी किए गए बच्चे को दिल्ली मुंबई ,दिल्ली या जहां से आर्डर मिलता था, मोटी रकम लेकर निसंतान रईस दंपति बिक्री कर देते थे. रईस निसंतान दंपत्ति अच्छी रकम देखकर बच्चों को खरीदने में सक्षम होते हैं. इसलिए इस गिरोह को मोटी कमाई होती थी. वहीं एसपी अंशिका वर्मा मुठभेड़ में घायल हुए दोनों बदमाशों योगेश और पवन से पूछताछ के बाद डॉक्टर संजय कुमार के सेंटर में ग्राहक बनकर पहुंच गईं, जहां डॉक्टर संजय कुमार और अपने साथी डॉक्टर केशव राम और नर्स सीता के साथ बैठा हुआ था.

आईपीएस अंशिका वर्मा को पहचान नहीं पाया डॉक्टर
डॉक्टर संजय कुमार अंशिका वर्मा को पहचान नहीं पाया और उस ने आईपीएस अधिकारी अंशिका वर्मा से 5 लाख रुपए में एक नवजात बच्चा देने का सौदा कर लिया. डॉ संजय ने अंशिका वर्मा से टोकन मनी के तौर पर आधी रकम जमा करने को कहा. अंशिका वर्मा ने अपने बैग से नोटों की गड्डी निकाल कर डॉक्टर संजय को दी और जैसे ही डॉक्टर संजय ने नोटों की गड्डी पकड़ी अंशिका वर्मा ने अपना सिंघम रूप दिखा दिया.


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