भारत और रूस के बीच Sukhoi Su-57 फाइटर जेट को लेकर चर्चाएँ तेज हैं, खासकर इसके एडवांस वर्ज़न M1 को लेकर। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच लाइसेंस प्रोडक्शन पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।

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Military Watch Magazine के अनुसार, भारत 100 से अधिक Su-57 विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

भारत को नए फाइटर जेट्स की तत्काल आवश्यकता है। देश अपना स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर विकसित कर रहा है, लेकिन उसे ऑपरेशनल होने में समय लगेगा। ऐसे में Su-57 एक अंतरिम समाधान के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि मौजूदा Su-57 को पूरी तरह स्टेल्थ नहीं माना जाता, और इसके इंजन व डिजाइन को लेकर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। इसी वजह से M1 वर्ज़न पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, Su-57 M1 में कई बड़े बदलाव संभव हैं। इसमें नया AL-51F1 engine लगाया जा सकता है, जो अधिक ताकतवर, कॉम्पैक्ट और बेहतर स्टेल्थ क्षमता वाला होगा। इसके अलावा, एडवांस्ड एवियोनिक्स, बेहतर सेंसर, डेटा फ्यूज़न और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताएं भी इसमें शामिल होंगी। डिजाइन में बदलाव, बेहतर एरोडायनामिक्स और कम रडार सिग्नेचर इसे पहले से अधिक स्टेल्थ-ऑप्टिमाइज़्ड बना सकते हैं।

रणनीतिक तौर पर भारत एक साथ पूरा ऑर्डर देने के बजाय चरणबद्ध खरीद की योजना अपना सकता है पहले 30-40 विमान, फिर अगला बैच, और बाद में अपग्रेडेड वर्ज़न। इससे तत्काल जरूरत भी पूरी होगी और भविष्य में बेहतर तकनीक अपनाने का विकल्प भी खुला रहेगा। साथ ही, जोखिम भी कम रहेगा। यदि तब तक भारत का स्वदेशी प्रोजेक्ट तैयार हो जाता है, तो देश धीरे-धीरे उसी पर शिफ्ट कर सकता है।

तुलना की बात करें तो F-22 Raptor अभी भी दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर जेट्स में गिना जाता है। Su-57 की ताकत इसकी मल्टी-रोल क्षमता में है, लेकिन स्टेल्थ, सेंसर और मिशन प्रोफाइल जैसे क्षेत्रों में सीधी तुलना करना अभी जल्दबाज़ी होगी।

राजनीतिक पहलू भी अहम है। यदि भारत रूस के साथ इतनी बड़ी डील करता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया कड़ी हो सकती है। खासकर ट्रंप जैसे नेता रूसी हथियार सौदों के खिलाफ सख्त रुख अपना सकते हैं। इसी कारण ऐसे समझौते अक्सर लो-प्रोफाइल रखे जाते हैं। संभावना है कि किसी बड़े मंच, जैसे BRICS Summit में इसकी आधिकारिक घोषणा की जाए।


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