ममता रानी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का भाजपा पर तीखा प्रहार, महिला आरक्षण के नाम पर गुमराह करने का आरोप, नारी शक्ति वंदन अधिनियम की खामियों को गिनाते हुए कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा—तत्काल लागू हो आरक्षण, नहीं तो यह सिर्फ राजनीतिक छलावा और जनता से किया गया वादा बनकर रह जाएगा

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रूद्रपुर। सिटी क्लब में आयोजित कांग्रेस की प्रेस वार्ता में महिला आरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा गया। महानगर अध्यक्ष ममता रानी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भाजपा के उस आरोप को सिरे से खारिज किया, जिसमें कांग्रेस को “महिला विरोधी” बताया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने इसे एक सुनियोजित राजनीतिक नैरेटिव बताते हुए कहा कि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
ममता रानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा देश की महिलाओं को भ्रमित कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2023 में महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित हो चुका था, तो उसे आज तक लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने इसे भाजपा की कथनी और करनी के बीच का स्पष्ट अंतर बताया। ममता रानी ने आरोप लगाया कि तथाकथित महिला सशक्तिकरण की आड़ में भाजपा सरकार ने सीटों के विस्तार और परिसीमन का राजनीतिक खेल खेलने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) की संरचना ही ऐसी है, जो इसे तत्काल लागू होने से रोकती है। सबसे बड़ी कमी यह है कि इसका क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि 2029 से पहले महिलाओं को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि यदि सरकार सच में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो मौजूदा सीटों के आधार पर ही इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
ममता रानी ने विधेयक की अन्य खामियों को भी विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोई आरक्षण नहीं है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसके अलावा सीटों के रोटेशन का प्रावधान भी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि इससे जनप्रतिनिधियों का अपने क्षेत्र के प्रति दीर्घकालिक जुड़ाव कमजोर हो सकता है। हर चुनाव में सीट बदलने की स्थिति में विकास कार्यों की निरंतरता प्रभावित होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक केवल 15 वर्षों के लिए लागू रहने वाला अस्थायी प्रावधान है, जो स्थायी समाधान नहीं देता। इससे यह संदेह और गहरा होता है कि भाजपा की मंशा वास्तविक सशक्तिकरण की नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ लेने की है।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से भ्रम और प्रचार की राजनीति करती आई है। महिला आरक्षण के मुद्दे को भी उसी रणनीति के तहत इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के बीच झूठ फैलाकर कांग्रेस की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि महिलाओं को राजनीतिक मुख्यधारा में लाने का श्रेय कांग्रेस को जाता है।
ठुकराल ने कहा कि भाजपा का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने उजागर हो चुका है। एक ओर वह महिला सशक्तिकरण की बात करती है, दूसरी ओर ऐसे प्रावधान लाती है जो इसे टालने का काम करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और आने वाले समय में भाजपा को इसका जवाब देंगी।
प्रेस वार्ता में मौजूद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी एक स्वर में इस मुद्दे पर पार्टी के रुख का समर्थन किया। इस दौरान संदीप चीमा, त्रिनाथ विश्वास, मोनिका ढाली, उमा सरकार, सतीश कुमार, बाबू विश्वकर्मा, सुनील चुग, अर्जुन विश्वास, नरेश सागर, प्रकाश सरकार, राम विलास शाह, विकास बंसल और संजय ठुकराल सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक को अधूरा और राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताते हुए उसकी कमियों को प्रमुखता से उजागर किया। पार्टी का कहना है कि जब तक इसे बिना शर्त और तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किया जाता, तब तक यह केवल एक राजनीतिक घोषणा बनकर ही रह जाएगा, न कि महिलाओं के सशक्तिकरण का वास्तविक माध्यम।


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