जो गद्दार हैं, उनके लिए अब सिर्फ एक ही रास्ता बचा है- जेल या जन्नत… जी हां, द‍िल्‍ली धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियां घर में छिपे गद्दारों पर टूट पड़ी हैं. जम्‍मू कश्मीर पुल‍िस, एनआईए, आईबी और सेना की इंटेलिजेंस यूनिट्स मिलकर ऐसे लोगों को दबोच रही हैं, ज‍िन्‍होंने भारत के ख‍िलाफ एक भी शब्‍द बोला हो.

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जो देश को खोखला करने की साज‍िश रच रहे हों. घाटी में तूफानी कार्रवाई चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियों ने एक साथ 1500 से ज्यादा ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है. सबसे ज्यादा कार्रवाई कुलगाम, अनंतनाग, शोपियां, सोपोर और गांदरबल जिलों में हुई. एजेंसियों ने यहां से जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े लोगों के घरों, दफ्तरों, मदरसों और अन्य परिसरों पर एक साथ दबिश दी. 200 से ज्‍यादा लोगों को उठाया है.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

कुलगाम में तो पुलिस ने अकेले ही 200 से ज्यादा लोकेशनों पर छापे मारे. जिन घरों में कभी जेहाद के लिए चंदे जुटते थे, वहां अब पुलिस ने दस्तक दी है. चार दिनों में कुलगाम में 400 से अधिक कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशंस किए गए. पुराने आतंकी ठिकाने, ओवर ग्राउंड वर्करों के घर और मुठभेड़ों से जुड़े इलाके खंगाले जा चुके हैं. दिल्ली धमाके के मुख्‍य आरोपी डॉ. उमर के कई सहयोगी दबोचे जा चुके हैं. एजेंसियां मान रही कि यह गिरोह किसी बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहा था, जिसे वक्त रहते नाकाम कर दिया गया.

शिक्षक, डॉक्टर और अफसरों पर नजर

सोपोर में भी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने 25 से अधिक जगहों पर एकसाथ छापे मारे. जैंगीर और रफियाबाद इलाकों में दबिश दी गई. ये वही इलाके हैं जहां से पहले भी आतंकियों को मदद मिलती रही है. पुलिस ने बताया कि कुछ पुराने जमात के कार्यकर्ता अब नए नामों से NGO, ट्रस्ट या शैक्षणिक संस्थान चला रहे थे, जिनका असली मकसद युवाओं को फिर से कट्टरपंथ की ओर मोड़ना था.

छापों के दौरान बड़ी मात्रा में भड़काऊ भाषणों की रिकॉर्डिंग, डिजिटल गैजेट, दस्तावेज, किताबें और पर्चे बरामद हुए हैं. कई लोगों से पूछताछ जारी है. एजेंसियां मान रही हैं कि गजवा-ए-हिंद और इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक विचारों को फिर से जिंदा करने की कोशिशें चल रही थीं. जिन लोगों को उठाया गया है, उनमें शिक्षक, डॉक्टर और अफसर भी शामिल बताए जा रहे हैं.

अनंतनाग में 500 संदिग्धों से पूछताछ

अनंतनाग पुलिस ने अब तक 500 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की है, जिनमें कई ऐसे हैं जो पाकिस्तान में बैठे “जेके-एनओपी” आतंकियों के रिश्तेदार हैं. दर्जनों लोगों को प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत मट्टन जिला जेल भेजा गया है. पुलिस ने छापों के दौरान कई डिजिटल डिवाइस, बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और विदेशी फंडिंग से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं. अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि घाटी के शिक्षक, डॉक्टर और अफसर तक कैसे इस नेटवर्क में शामिल हुए.

शोपियां में आतंकी चेन का खुलासा

ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्ट के मुताबिक, शोपियां में भी कार्रवाई जारी है. पुलिस ने जमात से जुड़े कई पुराने चेहरों पर शिकंजा कसा है. डॉ. हमीद फयाज और मोहम्मद यूसुफ फलाही जैसे नामों पर नजर है, दोनों के घरों में तलाशी ली गई. पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने बीते वर्षों में गुप्त सभाओं के जरिए युवाओं को भड़काने का काम किया. कई लैपटॉप और पेन ड्राइव जब्त किए गए हैं जिनमें भड़काऊ वीडियो और भाषणों का कलेक्शन मिला है.

गांदरबल: मेडिकल, अकादमिक और प्रशासनिक सर्कल में भी निगरानी

गांदरबल पुलिस ने भी कई ठिकानों पर छापे मारे. यहां जांच का फोकस उन “शहरी नेटवर्क” पर है जो आतंक के लिए फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराते हैं. इंटेलिजेंस एजेंसियों का कहना है कि अब सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि पेन, लैपटॉप और बैंक अकाउंट से भी जिहाद चलाया जा रहा है. मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से जुड़े कुछ नाम एजेंसियों की रडार पर हैं. ऐसे लोग जो बाहर से सोशल वर्कर दिखते हैं, लेकिन अंदर से कट्टर विचारधारा को बढ़ावा देते हैं.

गजवा-ए-हिंद का जहर फैलाने वालों की धरपकड़

सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक साल में कुछ मौलवियों और प्रवचकों ने गजवा-ए-हिंद और इस्लामिक स्टेट जैसे विचारों पर खुलकर भाषण दिए थे. दिल्ली धमाके के बाद इन सभी को क्लोज़ सर्विलांस पर रखा गया है. एजेंसियों को शक है कि इन्हीं भाषणों से युवाओं में नफरत और हिंसा का जहर भरा गया, जो धीरे-धीरे आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बन गए.

सियासी लोगों पर भी शक

इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने सिर्फ आतंकी या धार्मिक संगठनों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी है. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मुख्यधारा के राजनीतिक चेहरों की भी जांच की जा रही है , जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से जमात या उससे जुड़े तत्वों को संरक्षण दिया. कहा जा रहा है कि कुछ नेताओं ने शांति के नाम पर ऐसे लोगों को बचाया, जिन्होंने युवाओं को गुमराह किया और आतंक का माहौल तैयार किया.

एजेंसियों का ज्‍वाइंट ऑपरेशन

दिल्ली धमाके के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट संदेश दिया है- घर में छिपे गद्दार अब नहीं बचेंगे. राज्य पुलिस, एनआईए, आईबी, सीआरपीएफ और आर्मी इंटेलिजेंस ने साझा ऑपरेशन की रणनीति बनाई है. जहां भी संदिग्ध गतिविधियों की भनक मिली, वहां टीम तुरंत रवाना हो रही है. हर जिले में निगरानी टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं. ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस तीनों को मिलाकर जाल बिछाया गया है. दिल्ली धमाके के बाद लोग खुलकर कह रहे हैं कि अब कार्रवाई का वक्‍त है. कई इलाकों में लोग खुद पुलिस को सूचनाएं दे रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के कट्टर समर्थकों में भारी दहशत है. कई संदिग्ध घर छोड़कर भाग गए हैं, कुछ ने तो मोबाइल बंद कर दिए हैं.

क्‍या कह रहे एक्‍सपर्ट
जम्‍मू कश्मीर की गत‍िव‍िध‍ियों पर नजर रखने वाले अहमद अली फयाज ने एक्‍स पर लिखा, अब घाटीभर में जमात-ए-इस्लामी और उसके गैर-कैडर समर्थकों के साथ-साथ उन धार्मिक मौलवियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, जिन्होंने पहले ‘गजवा-ए-हिंद’ और ‘इस्लामिक स्टेट’ जैसे विषयों पर भाषण दिए थे. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, उनके मुख्यधारा के राजनीतिक समर्थक भी जांच के दायरे में हैं. मेडिकल प्रोफेशन, अकादमिक जगत और प्रशासन से जुड़े बड़ी संख्या में संदिग्धों और कट्टरपंथी तत्वों पर भी निगरानी रखी जा रही है.


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