पत्रकार बोले– हमला रूपेश पर नहीं, रुद्रपुर के समूचे पत्रकार समुदाय की आवाज पर हुआ है; न्याय के लिए हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे रूपेश
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
रुद्रपुर। पत्रकार रूपेश कुमार सिंह प्रकरण अब महज एक सड़क विवाद या पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्ता के कथित दबाव में पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के आरोपों के बीच एक बड़े सवाल के रूप में सामने आया है। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकार रूपेश कुमार सिंह ने अपने साथ हुए घटनाक्रम की पूरी पीड़ा बयां करते हुए उत्तराखंड की धामी सरकार और सत्ता के शिखर पर बैठे नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान रुद्रपुर के विभिन्न पत्रकार संगठनों, यूनियनों और मीडिया कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा संभाला।
रूपेश कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने आशंका जताई कि उनकी हत्या कराने का प्रयास किया गया और बाद में पूरे मामले को दूसरी दिशा देने के लिए उन्हें ही गंभीर आपराधिक मुकदमे में फंसा दिया गया। उनका कहना था कि यदि घटना के समय वह शराब के नशे में होते तो शायद आज जीवित नहीं होते। उन्होंने अपनी क्षतिग्रस्त कार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी गाड़ी आज भी कोतवाली में खड़ी है। कोई भी व्यक्ति वहां जाकर वाहन की स्थिति देख सकता है और स्वयं समझ सकता है कि उनके साथ क्या हुआ था।
पहले घटना, फिर पत्रकार के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा
उल्लेखनीय है कि 3 नवंबर की देर रात पत्रकार रूपेश कुमार सिंह रुद्रपुर से अपने घर दिनेशपुर लौट रहे थे। दानपुर के पास बोलेरो और उनकी स्विफ्ट डिजायर कार से जुड़े विवाद के बाद मारपीट की घटना सामने आई। इस घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग हैं। रूपेश कुमार की ओर से भी अपने साथ मारपीट और हमला किए जाने की बात कही गई।
दूसरी ओर, बोलेरो सवार ब्रिजेश यादव की तहरीर पर रुद्रपुर कोतवाली में एफआईआर संख्या 0584/2026 दर्ज की गई। उपलब्ध एफआईआर विवरण के अनुसार 4 नवंबर की सुबह 4:02 बजे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। यह धारा हत्या के प्रयास से संबंधित है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक दीपक बहुगुणा को सौंपी गई थी।
रूपेश कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज होने और उनकी गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में पत्रकार और कांग्रेस कार्यकर्ता रुद्रपुर कोतवाली पहुंच गए। कोतवाली में धरना-प्रदर्शन हुआ, नारेबाजी की गई और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। पत्रकारों ने पूछा कि आखिर इतनी गंभीर धारा लगाने से पहले घटनास्थल के साक्ष्यों, वाहन की स्थिति और दोनों पक्षों की शिकायतों की निष्पक्ष पड़ताल क्यों नहीं की गई?
न्यायालय से मिली राहत, धारा 109 हटने के बाद 323 में मामला
इस पूरे प्रकरण में 4 नवंबर को न्यायालय में सुनवाई के दौरान रूपेश कुमार सिंह को बड़ी राहत मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यायालय ने उनके विरुद्ध लगाई गई बीएनएस की धारा 109 को हटाते हुए जमानत प्रदान की। इसके बाद मामले में धारा 323 सहित अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की बात सामने आई।
यह घटनाक्रम पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े करता है। हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज होने के बाद न्यायालय में उसे हटाया जाना अब पत्रकारों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
पुलिस प्रशासन को दी क्लीन चिट, निशाने पर सत्ता के नेता
प्रेस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि रूपेश कुमार सिंह ने पुलिस प्रशासन के प्रति अपना रुख स्पष्ट करते हुए पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे में काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों तथा उन्हें मिले आदेशों के अनुसार काम करते हैं। उनका निशाना पुलिस के छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि सत्ता के उन शिखर पर बैठे लोगों पर है, जिनके इशारे पर उनके अनुसार यह पूरा घटनाक्रम रचा गया।
उन्होंने रुद्रपुर से लेकर देहरादून तक सत्ता पक्ष के नेताओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। प्रेस वार्ता में उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है।
रूपेश ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ लोगों की सोच और भाषा का स्तर इतना गिर गया है कि पत्रकार के लिए यह तक कहा गया कि ”बड़ा पत्रकार बनता है, हर किसी की धोता रहता है।” उनके अनुसार इस तरह के शब्द केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान पर चोट नहीं हैं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रति सत्ता से जुड़े लोगों की सोच को भी उजागर करते हैं।
अपनी तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं होने का आरोप
रूपेश कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में एक और गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर उन्होंने स्वयं भी रुद्रपुर कोतवाली में तहरीर दी थी, लेकिन उनकी शिकायत पर अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने इस कथित दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक पक्ष की शिकायत पर तत्काल हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई हो गई, लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
उन्होंने अपनी क्षतिग्रस्त गाड़ी को भी अपने पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उनकी शिकायत को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
पत्रकार संगठनों और यूनियनों की एकजुटता, सरकार के खिलाफ बढ़ा आक्रोश
आज की प्रेस वार्ता में सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक तस्वीर पत्रकारों की एकजुटता के रूप में सामने आई। रुद्रपुर के विभिन्न पत्रकार संगठनों, यूनियनों और स्वतंत्र पत्रकारों ने एक मंच पर आकर रूपेश कुमार सिंह के साथ हुए घटनाक्रम पर अपना विरोध दर्ज कराया।
पत्रकारों का स्पष्ट कहना था कि यह लड़ाई किसी एक पत्रकार की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। यदि आज एक पत्रकार को निशाना बनाया जा सकता है तो कल किसी दूसरे पत्रकार के साथ भी ऐसा हो सकता है। रूपेश कुमार सिंह ने भी इसी भावना को व्यक्त करते हुए कहा कि उन पर हुआ हमला केवल उन पर हमला नहीं है, बल्कि रुद्रपुर के प्रत्येक पत्रकार की आवाज पर हमला है। उन्होंने कहा कि आज उनकी जो आवाज है, वह रुद्रपुर के सभी पत्रकारों की आवाज है।
उन्होंने पत्रकार समुदाय से एकजुट रहने की अपील करते हुए स्पष्ट किया कि वह अपने और पत्रकारों के न्याय के लिए कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे, लेकिन न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।
अब सरकार और प्रशासन के सामने कई सवाल
आज की प्रेस वार्ता ने उत्तराखंड की धामी सरकार के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या किसी पत्रकार की शिकायत पर भी उसी तत्परता से कार्रवाई होगी, जिस तत्परता से उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया? हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा लगाने का आधार क्या था? न्यायालय में वह धारा क्यों हटाई गई? रूपेश की ओर से दी गई तहरीर पर अब तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ? क्या इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होगी?
प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ पत्रकार आकाश आहूजा ने भी अपने संबोधन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने फिल्म का उदाहरण देते हुए राजनीतिक प्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए और व्यंग्यात्मक अंदाज में अपनी बात रखी। उनका संबोधन इस बात का संकेत था कि पत्रकारों की नाराजगी अब केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के रवैये और पत्रकारों के प्रति उनकी कथित सोच को लेकर भी असंतोष गहराता जा रहा है।
फिलहाल रूपेश कुमार सिंह प्रकरण ने रुद्रपुर की पत्रकारिता को एक साझा मंच पर खड़ा कर दिया है। आज की प्रेस वार्ता में पत्रकारों की एकजुटता ने यह संकेत जरूर दे दिया कि मामला अब केवल कोतवाली और न्यायालय की चारदीवारी तक सीमित रहने वाला नहीं है।
सत्ता के गलियारों से लेकर पुलिस प्रशासन तक अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पत्रकारों की इस सामूहिक आवाज का सरकार क्या जवाब देती है। रुद्रपुर में पत्रकारों ने अपनी एकजुटता से साफ संदेश दिया है कि पत्रकारिता की आवाज को दबाने के किसी भी कथित प्रयास का विरोध किया जाएगा और न्याय की लड़ाई को कानूनी अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
