द्वाराहाट/अल्मोड़ा। शिवसेना कुमाऊं मंडल एवं मां दूनागिरी गौरक्षा मिशन, द्वाराहाट के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को उपजिलाधिकारी, द्वाराहाट के माध्यम से राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री उत्तराखंड को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल के कथित गौमाता संबंधी बयान पर कड़ा विरोध दर्ज करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि गौमाता करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र हैं और उनके संबंध में दिया गया कोई भी आपत्तिजनक बयान धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। शिवसेना पदाधिकारियों ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में गौवंश के प्रति विशेष श्रद्धा रही है और गौमाता का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
संगठन ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 30 सितंबर 2024 को गौमाता को ‘राज्यमाता-गोमाता’ का दर्जा दिए जाने का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड सरकार से भी इसी प्रकार का निर्णय लेने की मांग की। ज्ञापन में प्रदेश में गौहत्या, गौतस्करी एवं गौमांस की बिक्री पर और अधिक कठोर कानून बनाने, दोषियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान करने तथा गौशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की मांग भी की गई।
शिवसेना कुमाऊं मंडल प्रमुख पुरनचंद भट्ट ने कहा कि गौमाता पर अपमानजनक टिप्पणी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान करने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार को महाराष्ट्र की तर्ज पर गौमाता को विशेष सम्मान देने का निर्णय लेना चाहिए। यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो शिवसेना सड़कों पर उतरकर प्रदेशव्यापी जनआंदोलन छेड़ेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
शिवसेना कुमाऊं मंडल ने कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक अस्मिता से जुड़ा विषय है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
