कहानियां वक्त और दूरियों की सीमा से परे होती हैं, और जब वो हकीकत बनती हैं, तो पथराई आंखों से भी आंसुओं का समंदर बह निकलता है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग के दौलीगाड़ क्षेत्र से ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

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यहां वर्ष 1980 में महज 15 साल की उम्र में लापता हुआ एक बेटा पूरे 46 साल बाद बाबा (संन्यासी) के वेश में अपने घर लौटा। बरसों से बेटे की राह तक रही बूढ़ी मां ने जैसे ही अपने लाडले को देखा, आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और बेटे के सीने से लिपट गई। इस भावुक मिलन को देख पूरा गांव भी अपने आंसू नहीं रोक पाया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

मिली जानकारी के अनुसार, बेरीनाग के दौलीगाड़ गांव निवासी बुद्धि बल्लभ उपाध्याय वर्ष 1980 के दौरान अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। परिजनों ने उसे ढूंढने की लाख कोशिशें कीं, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा। वर्ष 2005 में पिता तारा दत्त उपाध्याय की मृत्यु हो गई। इसके बाद भी मां नंदी देवी अपने बेटे के इंतजार में राह ताकती रही। वक्त बीतता गया, दिन महीनों में और महीने सालों में बदलते चले गए। धीरे-धीरे 46 साल का लंबा अरसा गुजर गया, लेकिन एक मां का दिल हमेशा यही कहता रहा कि उसका बेटा एक दिन जरूर लौटेगा।

मां के हाथों भिक्षा लेने की हठ लाई वापस

बेरीनाग। 46 साल बाद जब वह वापस लौटा, तो उसका रूप पूरी तरह बदल चुका था। सिर पर जटाएं, बदन पर भगवा वस्त्र और चेहरे पर वैराग्य के भाव, वह अब एक पूर्ण संन्यासी बन चुका था। जब उससे पूछा गया कि इतने सालों बाद उसे घर की याद कैसे आई, तो कहानी और भी भावुक कर देने वाली निकली। बेटे ने बताया कि मां के हाथों से भिक्षा लेने की इसी तड़प और हसरत ने मुझे इतने दशकों बाद वापस अपने गांव और अपनी मां के पास खींच लाया।

फिर छूट जाएगा ममता का आंचल

बेरीनाग। इस मिलन की खुशी जहां आसमान छू रही है, वहीं इसमें एक गहरा दर्द भी छिपा है। संन्यास की राह पर आगे बढ़ चुका यह बेटा अब सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्त हो चुका है।अपनी मां के हाथों भिक्षा लेने का संकल्प पूरा करने के बाद, वह 7 जून को दोबारा अपनी मां और इस गांव को छोड़कर वापस अध्यात्म की दुनिया में लौट गया।

बुद्धनाथ नाम रखा था नाम अपना

बेरीनाग। बुद्धिबल्लभ उपाध्याय ने अपना जोगी का रूप धारण करने के दौरान अपना नाम बुद्धिबल्लभ से बदलकर बुद्धनाथ रख दिया और पता भी हिमाचल प्रदेश का रखा। बुद्धिबल्लभ की वर्तमान में 12फीट से अधिक लम्बी जटा है बुद्धिबल्लभ के घर पहुंचते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में उनसे मिलने पहुंचे और बाबा के रूप में आशीर्वाद लिया।

हरिद्वार, बीकानेर में धारण किया साधु का भेष

बेरीनाग। बुद्धिबल्लभ बताते है कि उन्होंने घर से चले जाने के बाद ट्रक सहित अन्य गाडियों में काम किया। जिसके बाद उन्होंने हरिद्वार व राजस्थान बीकानेर के एक मंदिर में बाबा का रूप धारण किया।


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