पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं के आधार पर कई एफआईआर दर्ज करके अपनी मामले की जांच तेज कर दी है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बार-बार दी गई चेतावनी को पूरी तरह से अनसुना कर दिया गया। हिंसक भीड़ ने जानबूझकर लागू निषेधाज्ञा का गंभीर उल्लंघन करते हुए पुलिस बैरिकेड को तोड़ने का प्रयास किया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर भारी पथराव किया और कई सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इस हिंसक और जानलेवा हमले में कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में पुलिस वाले घायल हुए हैं।
118 पुलिसकर्मी हुए घायल
इस हिंसक भीड़ के भयंकर पथराव और हमले में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी बहुत ही बुरी तरह से घायल हुए हैं। इनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर और डीसीपी रैंक के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पूरी तरह शामिल हैं। इसके अलावा कई महिला पुलिसकर्मियों को भी ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से कई चोटें आई हैं। घायल जवानों का अस्पताल में मेडिको-लीगल जांच (MLC) और इलाज बहुत ही तेजी से किया जा रहा है।
70 प्रदर्शनकारी हिरासत में
पुलिस और भीड़ के बीच हुई इस भारी हाथापाई में लगभग 60 प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की खबर है। पुलिस ने मौके से सख्त कार्रवाई करते हुए लगभग 70 उग्र प्रदर्शनकारियों को तुरंत हिरासत में ले लिया है। इन सभी उपद्रवियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और अन्य लागू कानूनों के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस हिंसा में शामिल अन्य लोगों की भी वीडियो फुटेज के जरिए बहुत बारीकी से पहचान कर रही है।
20 सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़
हिंसक भीड़ ने पुलिस और आम जनता की सुरक्षा के लिए एक बहुत ही गंभीर और बड़ा खतरा पैदा कर दिया था। इस घटना के दौरान लगभग 15 से 20 सरकारी गाड़ियों को बहुत ही बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया और बड़े पैमाने पर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की। पुलिस सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
