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गड्ढामुक्त उत्तराखंड पर कटाक्षउत्तराखंड को गड्ढामुक्त करने का अभियान जारी है, मगर बाजपुर की तस्वीर व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करती है। सड़क की मरम्मत का जिम्मा विभाग का है, लेकिन जिलाधिकारी को खुद मौके पर खड़े होकर गड्ढे भरवाने पड़ रहे हैं। सवाल है—जब डीएम साहब सड़क बनवाएंगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आखिर क्या करेंगे? क्या विभाग तब जागेगा, जब जिलाधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे? सड़कें बार-बार टूटें, फिर मरम्मत हो और दोबारा वही कहानी शुरू हो—यह व्यवस्था कब बदलेगी? गड्ढे भरना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है यह तय करना कि गड्ढे पड़े ही क्यों और इसके लिए जवाबदेह कौन है

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला करने और विमान को क्रैश कराने की कोशिश करने वाले ओमान के को-पायलट की पहचान हमाम अल हम्मामी (Hamam Alhamami) के रूप में हुई है।

प्रेमानंद महाराज का केलि कुंज इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है. एक के बाद एक नई खबर निकल कर सामने आ रही हैं. पहले प्रेमानंद महाराज रसिक दुलाही की आत्महत्या फिर आश्रम में दीक्षा लेने आया सादाबाद का अनुज चौधरी गायब हो गया.

सूर्य और शनि का समसप्तक योग ज्योतिष और खगोल विज्ञान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली घटना माना जाता है। जब दो प्रमुख ग्रह एक-दूसरे से ठीक 180 डिग्री की दूरी पर यानी आमने-सामने (एक-दूसरे के सातवें भाव में) स्थित होते हैं, तो इसे ‘समसप्तक योग’ या ‘प्रतियुति’ कहा जाता है।

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दशक के किसान मेले से आज के पंतनगर तकहिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की दस्तक: 80 के दशक के किसान मेले से आज के पंतनगर तकबचपन की बस यात्राओं से मोबाइल कैमरों तक पहुंचा किसान मेला, बदलती कृषि के बीच पंतनगर की जमीन और विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर भी सवाल

पंतनगर, 4 अक्टूबर 2026।पंतनगर का किसान मेला मेरे लिए केवल एक कृषि प्रदर्शनी नहीं है।…

ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह माना जाता है। इसे वैराग्य, आध्यात्मिकता, रहस्य, अचानक बदलाव, पुराने कर्म, भ्रम से मुक्ति और किसी चीज से दूरी बनाने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब केतु किसी विशेष राशि और नक्षत्र में प्रवेश करता है…

सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों की विदाई का दिन, कुतुप मुहूर्त में श्राद्ध-तर्पण का विशेष महत्व

रुद्रपुर। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण…

एशियाई खेल 2026 में भारत ने अपना अभियान 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर खत्म किया. भारतीय खिलाड़ियों ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते. खास बात यह रही कि भारत ने पदक तालिका में वही चौथा स्थान हासिल किया, जो पिछले एशियाई खेलों में मिला था.

दिन का सबसे शानदार अंत भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जीत के साथ हुआ। टीम…

दुनिया

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सिनेमा से कैंची धाम तक ‘हनुमान अंश’ की आंधी: क्या बदल रही है हिंदू धर्म में आध्यात्मिकता की परिभाषा?एक नया आध्यात्मिक पुनर्जागरण

गड्ढामुक्त उत्तराखंड पर कटाक्षउत्तराखंड को गड्ढामुक्त करने का अभियान जारी है, मगर बाजपुर की तस्वीर व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करती है। सड़क की मरम्मत का जिम्मा विभाग का है, लेकिन जिलाधिकारी को खुद मौके पर खड़े होकर गड्ढे भरवाने पड़ रहे हैं। सवाल है—जब डीएम साहब सड़क बनवाएंगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आखिर क्या करेंगे? क्या विभाग तब जागेगा, जब जिलाधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे? सड़कें बार-बार टूटें, फिर मरम्मत हो और दोबारा वही कहानी शुरू हो—यह व्यवस्था कब बदलेगी? गड्ढे भरना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है यह तय करना कि गड्ढे पड़े ही क्यों और इसके लिए जवाबदेह कौन है

पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेले का शुभारंभराज्यपाल बोले—समृद्ध किसान और आधुनिक तकनीक से बनेगा सशक्त उत्तराखंड‘बीज से बाजार तक’ मजबूत हो पूरी श्रृंखला, कृषि में तकनीक और युवा शक्ति को मिले बढ़ावा

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला करने और विमान को क्रैश कराने की कोशिश करने वाले ओमान के को-पायलट की पहचान हमाम अल हम्मामी (Hamam Alhamami) के रूप में हुई है।

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गड्ढामुक्त उत्तराखंड पर कटाक्षउत्तराखंड को गड्ढामुक्त करने का अभियान जारी है, मगर बाजपुर की तस्वीर व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करती है। सड़क की मरम्मत का जिम्मा विभाग का है, लेकिन जिलाधिकारी को खुद मौके पर खड़े होकर गड्ढे भरवाने पड़ रहे हैं। सवाल है—जब डीएम साहब सड़क बनवाएंगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आखिर क्या करेंगे? क्या विभाग तब जागेगा, जब जिलाधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे? सड़कें बार-बार टूटें, फिर मरम्मत हो और दोबारा वही कहानी शुरू हो—यह व्यवस्था कब बदलेगी? गड्ढे भरना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है यह तय करना कि गड्ढे पड़े ही क्यों और इसके लिए जवाबदेह कौन है

गड्ढामुक्त उत्तराखंड या विभागीय लापरवाही? डीएम को खुद संभालनी पड़ी सड़कडीएम साहब सड़क बनवा रहे हैं, फिर पीडब्ल्यूडी क्या कर…

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पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेले का शुभारंभराज्यपाल बोले—समृद्ध किसान और आधुनिक तकनीक से बनेगा सशक्त उत्तराखंड‘बीज से बाजार तक’ मजबूत हो पूरी श्रृंखला, कृषि में तकनीक और युवा शक्ति को मिले बढ़ावा

पंतनगर, 3 अक्टूबर। जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में शनिवार को 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि…

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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला करने और विमान को क्रैश कराने की कोशिश करने वाले ओमान के को-पायलट की पहचान हमाम अल हम्मामी (Hamam Alhamami) के रूप में हुई है।

हरियाणा से रोचक मामला सुनने को आया है। जिसके बारें में सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। जानकारी के लिए हम आपको बता दे कि एक महिला ने अपनी पति से यह कहकर पायल उताराई, कि यह पांव में चुभती है।

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकट बंटवारे के गणित पर टिकी हैं। इसी बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर एक बड़ा सियासी अपडेट सामने आया है। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा इस बार उत्तर प्रदेश में करीब 100 मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है।

दुबई से उड़ान भरकर इजराइल जाने वाले विमान में कट्टरपंथी को पायलट ने जिस तरह से उसे क्रैश करने की कोशिश की और फिर अपनी जान जोखिम में डालकर भारतीय कैप्टन स्मित ने इस कोशिश को नाकाम करते हुए 170 से ज्यादा यात्रियों को बचाया।

दशक के किसान मेले से आज के पंतनगर तकहिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की दस्तक: 80 के दशक के किसान मेले से आज के पंतनगर तकबचपन की बस यात्राओं से मोबाइल कैमरों तक पहुंचा किसान मेला, बदलती कृषि के बीच पंतनगर की जमीन और विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर भी सवाल

पंतनगर, 4 अक्टूबर 2026।पंतनगर का किसान मेला मेरे लिए केवल एक कृषि प्रदर्शनी नहीं है। यह मेरी स्मृतियों का वह हिस्सा है, जहां बचपन, किशोरावस्था, किसान, खेत, बस की यात्रा,…

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ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह माना जाता है। इसे वैराग्य, आध्यात्मिकता, रहस्य, अचानक बदलाव, पुराने कर्म, भ्रम से मुक्ति और किसी चीज से दूरी बनाने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब केतु किसी विशेष राशि और नक्षत्र में प्रवेश करता है तो उसके प्रभाव को उस राशि से जुड़े जीवन के क्षेत्रों के आधार पर देखा…

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सर्वपितृ अमावस्या 2026: पितरों की विदाई का दिन, कुतुप मुहूर्त में श्राद्ध-तर्पण का विशेष महत्व

रुद्रपुर। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का विशेष काल माना जाता है। इन दिनों परिवार अपने दिवंगत परिजनों की आत्मिक शांति…

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एशियाई खेल 2026 में भारत ने अपना अभियान 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर खत्म किया. भारतीय खिलाड़ियों ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते. खास बात यह रही कि भारत ने पदक तालिका में वही चौथा स्थान हासिल किया, जो पिछले एशियाई खेलों में मिला था.

दिन का सबसे शानदार अंत भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जीत के साथ हुआ। टीम इंडिया ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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नाम-कंचन नाथ। उम्र-17 साल। कर्म-मानव कल्याण के लिए तप। संपत्ति-करोड़ों की मालकिन और स्थान ढाकल गांव, हरियाणा। यह परिचय उस किशोरी का है, जिसने सांसारिक मोह-माया त्यागकर साध्वी का जीवन अपना लिया।

कंचन नाथ इन दिनों चिलचिलाती धूप में ‘अग्नि तप’ कर रही हैं, और उनके तप की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/…

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दशक के किसान मेले से आज के पंतनगर तकहिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की दस्तक: 80 के दशक के किसान मेले से आज के पंतनगर तकबचपन की बस यात्राओं से मोबाइल कैमरों तक पहुंचा किसान मेला, बदलती कृषि के बीच पंतनगर की जमीन और विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर भी सवाल

पंतनगर, 4 अक्टूबर 2026।पंतनगर का किसान मेला मेरे लिए केवल एक कृषि प्रदर्शनी नहीं है। यह मेरी स्मृतियों का वह हिस्सा है, जहां बचपन, किशोरावस्था, किसान, खेत, बस की यात्रा, […]

ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह माना जाता है। इसे वैराग्य, आध्यात्मिकता, रहस्य, अचानक बदलाव, पुराने कर्म, भ्रम से मुक्ति और किसी चीज से दूरी बनाने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।

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दिन का सबसे शानदार अंत भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जीत के साथ हुआ। टीम इंडिया ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस […]

संपादकीय | मतदाता सूची की सफाई जरूरी, लेकिन लोकतंत्र की कीमत पर नहींSIR पर सियासी संग्राम के बीच असली सवाल—कितने अपात्र हटे और कितने पात्र मतदाताओं के नाम कटे? उत्तराखंड में बदले मतदाता गणित ने बढ़ाई चिंताअवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

देश इस समय एक ऐसे चुनावी विवाद के दौर से गुजर रहा है, जिसका सीधा संबंध लोकतंत्र की सबसे बुनियादी ताकत—मतदाता और उसका वोट—से है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR […]

यमुना पुल पर भीषण हादसे में तीन युवकों की मौत, बनबसा में कैबिनेट बैठक और चुनावी रणनीति पर भाजपा का मंथनयमुना पुल पर भीषण हादसे में तीन युवकों की मौत, बनबसा में कैबिनेट बैठक और चुनावी रणनीति पर भाजपा का मंथन

उत्तराखंड/पांवटा साहिब/चंपावत/देहरादून। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा से सटे पांवटा साहिब क्षेत्र में यमुना-कुल्हाल पुल पर देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो […]

खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में अगले तीन दिन शहर जनजातीय लोक परंपराओं के रंग में डूबने जा रहा है।

चार से छह अक्टूबर तक मंडी समिति के पास में होने वाले आदि रंगोत्सव में उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों के जनजातीय सांस्कृतिक दल न केवल अपनी कला और सांस्कृतिक परंपराओं […]

उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या की एक नई तस्वीर भी सामने आई है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना में पर्वतीय क्षेत्र के मुकाबले मैदानी इलाकों में दोगुने वोट कटे हैं।

राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 34 विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह से पर्वतीय हैं, जबकि मैदानी इलाकों में 36 विधानसभा सीटें हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के अलावा पौड़ी की […]

सिनेमा से कैंची धाम तक ‘हनुमान अंश’ की आंधी: क्या बदल रही है हिंदू धर्म में आध्यात्मिकता की परिभाषा?एक नया आध्यात्मिक पुनर्जागरण

उत्तराखंड (कैंची धाम): इतिहास खुद को दोहरा रहा है। आज से ठीक 51 साल पहले, सन् 1975 में जब ‘जय संतोषी मां’ फिल्म रिलीज हुई थी, तब देश के कोने-कोने […]

गड्ढामुक्त उत्तराखंड पर कटाक्षउत्तराखंड को गड्ढामुक्त करने का अभियान जारी है, मगर बाजपुर की तस्वीर व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करती है। सड़क की मरम्मत का जिम्मा विभाग का है, लेकिन जिलाधिकारी को खुद मौके पर खड़े होकर गड्ढे भरवाने पड़ रहे हैं। सवाल है—जब डीएम साहब सड़क बनवाएंगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आखिर क्या करेंगे? क्या विभाग तब जागेगा, जब जिलाधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे? सड़कें बार-बार टूटें, फिर मरम्मत हो और दोबारा वही कहानी शुरू हो—यह व्यवस्था कब बदलेगी? गड्ढे भरना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है यह तय करना कि गड्ढे पड़े ही क्यों और इसके लिए जवाबदेह कौन है

गड्ढामुक्त उत्तराखंड या विभागीय लापरवाही? डीएम को खुद संभालनी पड़ी सड़कडीएम साहब सड़क बनवा रहे हैं, फिर पीडब्ल्यूडी क्या कर रहा है?गड्ढे सड़क पर, सवाल सिस्टम पर—डीएम की मौजूदगी ने […]