वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस पर व्याख्यान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित

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देहरादून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून के परिसर संस्थान महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में विज्ञान भारती (विभा) एवं प्रज्ञा प्रवाह के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

कार्यक्रम के अंतर्गत वृक्षारोपण अभियान, वैज्ञानिक व्याख्यान, पर्यावरण संरक्षण पर विचार-विमर्श तथा विद्यार्थियों को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ परिसर में वृक्षारोपण के साथ हुआ। संस्थान निदेशक, आमंत्रित अतिथियों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व के लिए भी अनिवार्य हैं। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के बीच वृक्षारोपण एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आया है।
वृक्षारोपण कार्यक्रम के उपरांत संस्थान के सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रोफेसर डॉ. हेमवती नन्दन, हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय, श्रीनगर, डॉ. संतोष कुमार राय, वैज्ञानिक-एफ, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून, डॉ. गौतम रावत, वैज्ञानिक-ई, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून, डॉ. के. डी. पुरोहित, पूर्व प्रोफेसर, हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष विज्ञान भारती, डॉ. आशीष बगवारी, डीन रिसर्च एवं अकादमिक, डॉ. विशाल रमोला, फैकल्टी समन्वयक, फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी, कार्यक्रम संयोजक श्री के. सी. मिश्रा, श्री अंशु सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के स्वागत उद्बोधन में डॉ. विशाल रमोला ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या संस्थागत प्रयासों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. गौतम रावत, वैज्ञानिक-ई, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून ने पर्यावरण संरक्षण के भारतीय दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परम्पराओं में प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है। जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार समझा गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परम्परा दोनों ही पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर समान रूप से बल देते हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनेगी तो भविष्य की अनेक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव हो सकेगा।
इसके बाद डॉ. संतोष कुमार राय, वैज्ञानिक-एफ, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून ने अपने व्याख्यान में पर्यावरण के वैज्ञानिक पक्षों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पर्यावरणीय तंत्र, जैव विविधता, पारिस्थितिकी संतुलन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सरल एवं वैज्ञानिक ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी का पर्यावरण एक जटिल लेकिन अत्यंत संतुलित प्रणाली है, जिसमें प्रत्येक जीव और प्राकृतिक तत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन इस संतुलन को प्रभावित कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, प्राकृतिक आपदाओं और जैव विविधता में कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
विशिष्ट वक्ता डॉ. के. डी. पुरोहित, पूर्व प्रोफेसर हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष विज्ञान भारती ने अपने दीर्घ शैक्षणिक एवं सामाजिक अनुभवों को साझा करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता का विकास प्रकृति के साथ संतुलित संबंधों पर आधारित रहा है, लेकिन आधुनिक विकास की दौड़ में प्रकृति का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान पीढ़ी पर्यावरण के प्रति सजग नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
डॉ. पुरोहित ने अपने संबोधन में जल संरक्षण, वन संरक्षण, जैव विविधता के महत्व तथा स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में जनसहभागिता की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल पर्यावरण दिवस पर ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करें तथा अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक बनाएं।
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर डॉ. हेमवती नन्दन ने भी पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि समाज में जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में शोध, नवाचार एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक श्री के. सी. मिश्रा ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग देने वाले सभी संस्थानों, अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान भारती और प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ युवाओं को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित श्री अंशु सिंह ने भी विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हुए प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़े बदलाव संभव हैं और प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
समापन सत्र में डॉ. आशीष बगवारी, डीन रिसर्च एवं अकादमिक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, आयोजकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक विषय नहीं बल्कि मानव जीवन से जुड़ा हुआ दायित्व है। उन्होंने अपने संबोधन में वास्तविक जीवन के अनेक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार व्यक्तिगत स्तर पर किए गए प्रयास पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जल बचाना, ऊर्जा की खपत कम करना, प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करना, अधिक से अधिक वृक्ष लगाना तथा प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री अदिति सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए सभी सत्रों को क्रमबद्ध रूप से संपन्न कराया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं जागरूकता बढ़ाने वाला सिद्ध हुआ। वृक्षारोपण अभियान और वैज्ञानिक व्याख्यानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यापक रूप से प्रसारित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत विकास के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने एक स्वर में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का साझा दायित्व है। विश्व पर्यावरण दिवस का यह आयोजन इसी सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।


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