कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से घटाकर चार किए जाने को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपनी आर्थिक नीतियों से लाखों गरीब परिवरों एवं महिलाओं को लकड़ी के जहरीले धुएं की तरफ धकेल दिया है।

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कांग्रेस सांसद ने किया दावा
उन्होंने दावा किया कि अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्जमाफी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना, ये ”लूट का मोदी मॉडल” है। सरकार ने हाल में उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की वार्षिक सीमा नौ से घटाकर चार कर दी है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

पिछले साल भी घटाई थी सिलेंडर की संख्या
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को कहा कि यह बदलाव औसत घरेलू खपत को ध्यान में रखते हुए किया गया है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत पहले लाभार्थियों को साल में 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलते थे। हालांकि, पिछले साल सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या घटाकर नौ कर गई थी, जिसे अब और भी घटाकर चार कर दिया गया है।

कांग्रेस सांसद ने एक्स पर किया पोस्ट
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि 12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और कम्प्रोमाइज्ड विदेश नीति ने आज देश को ऐसे हालात में ला खड़ा कर दिया है जहां लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को लकड़ी के ज़हरीले धुएं की तरफ धकेल दिया गया है।

पहले दाम बढ़ाओ फिर सब्सिडी घटाओ
उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर चार कर दी गई। उस पर पिछले 3 महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 89 रुपये बढ़ा दिए गए, मतलब, पहले दाम बढ़ाओ, फिर सब्सिडी घटाओ, गरीबों का चूल्हा बुझाओ।

मोदी सरकार पर बोला जोरदार हमला
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रवासी मजदूरों की जीवनरेखा, पांच किलोग्राम का सिलेंडर भी 323 रुपये महंगा कर दिया गया और ऐसे में वो कमाएगा क्या, खाएगा क्या, और बचाएगा क्या? राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अरबपति मित्रों को लाखों करोड़ों की कर्जमाफी दिलाना और गरीबों को अपनी नाकामियों का बिल थमाना, ये लूट का मोदी मॉडल है।
उन्होंने सवाल किया कि मोदी जी, क्या आपकी नाकामियों का बोझ सिर्फ गरीब उठाएंगे? क्या आपकी बनाई इस चरमराती अर्थव्यवस्था की कीमत मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग ही चुकाएंगे?


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