दरअसल, एक विवाद के बाद नगरासू गुरुद्वारे में कुछ निहंग सिख गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए थे और ऊपर जाने का रास्ता भी बंद कर दिया. पहले दो निहंग नीचे आए और उन्होंने प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन से बातचीत की. इसके बाद बाकी निहंग भी मान गए और छत से नीचे उतरने को तैयार हो गए. रास्ते में लगाए गए गद्दे भी हटा दिए गए.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
मारपीट और हंगामे से बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि निहंग सिखों ने पहले गुरुद्वारे के सेवादारों से मारपीट की और जमकर हंगामा किया. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि एक श्रद्धालु को बंधक बनाया गया था. इस घटना के बाद गुरुद्वारे और आसपास के इलाके में तनाव का माहौल बन गया था.
पुलिस की सूझबूझ से संभला मामला
रुद्रप्रयाग की एसपी निहारिका तोमर के अनुसार, शनिवार शाम करीब 3:45 बजे विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए दोनों पक्षों से बातचीत की. इसी दौरान कुछ निहंग छत पर चढ़ गए थे, लेकिन शांतिपूर्ण वार्ता से मामला सुलझा लिया गया.
प्रशासन ने किया स्थिति सामान्य होने का दावा
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि गुरुद्वारे में किसी तरह का कब्जा नहीं किया और न ही किसी को बंधक बनाया गया था. उन्होंने बताया कि गुरुद्वारे में सभी गतिविधियां जैसे अरदास, लंगर और आवाजाही सामान्य रूप से चल रही थीं. हेमकुंड साहिब यात्रा पर भी कोई असर नहीं पड़ा.
गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग बनी वजह
दरअसल, यह पूरा विवाद कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ा है. 16 जून को कर्णप्रयाग बाजार में विवाद के बाद चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था. इन्हें छोड़ने की मांग को लेकर अन्य निहंग नगरासू गुरुद्वारे पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे.
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे निहंगों के पास भाला, तलवार, कुल्हाड़ी और कृपाण जैसे पारंपरिक हथियार मौजूद थे. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था और हालात काबू में रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे.
क्या था कर्णप्रयाग विवाद?
कर्णप्रयाग बाजार में निहंग सिखों का वाहन खड़ा करने को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हो गया था. आरोप है कि विवाद के दौरान तलवार से हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया. इस मामले में पंजाब के मोहाली के रहने वाले चार सिख श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया, जिसके विरोध में यह पूरा घटनाक्रम सामने आया.
गुरुद्वारे में ठहरने को लेकर विवाद
गुरुद्वारे के प्रबंधक बेअंत सिंह के मुताबिक, पंजाब से आए निहंगों ने 50 से 60 कमरों की व्यवस्था करने की मांग की थी, ताकि प्रदर्शनकारियों को ठहराया जा सके. जब प्रबंधन ने असमर्थता जताई तो निहंगों ने हंगामा शुरू कर दिया और बाद में छत पर चढ़ गए.
