नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में बढ़ती भीड़, निर्माण गतिविधियों, अतिक्रमण और ट्रैफिक अव्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नागरिकों ने गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। क्षेत्र में नदी किनारे और संवेदनशील भूभागों पर हुए निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी क्षेत्र में अतिक्रमण और बहुमंजली इमारतों के निर्माण से प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण, नदी तटों पर दबाव और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से भविष्य में भूस्खलन, जलभराव और अन्य प्राकृतिक जोखिम बढ़ सकते हैं। उनका मानना है कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
इधर, मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ निर्णयों और भूमि संबंधी मामलों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा नहीं की गई है। मंदिर समिति की ओर से इन मुद्दों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
वहीं, श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण ट्रैफिक व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। प्रमुख पर्वों और आयोजनों के दौरान लंबा जाम लगने से स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पार्किंग, यातायात प्रबंधन और अतिक्रमण नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है।
कैंची धाम और राम मंदिर प्रकरण: धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता की आवश्यकता
अयोध्या के राम मंदिर में दानपात्रों से कथित धन गबन के आरोपों ने देशभर के धार्मिक संस्थानों की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि सवा साल तक व्यवस्थित रूप से दान राशि में हेराफेरी होती रही और सुरक्षा तंत्र को इसकी जानकारी नहीं हुई, तो यह केवल एक मंदिर का मामला नहीं बल्कि पूरे धार्मिक प्रशासनिक ढांचे के लिए चेतावनी है। श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के साथ दान देते हैं, इसलिए उन्हें यह जानने का पूरा अधिकार है कि प्राप्त धनराशि का उपयोग कहाँ और कैसे किया जा रहा है।
इसी संदर्भ में उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम को भी एक सुव्यवस्थित अधिकरण अथवा पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत लाने की मांग उठ रही है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस धाम में आय और व्यय का नियमित सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। आधुनिक तकनीक, डिजिटल ऑडिट, थर्ड पार्टी जांच और वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं लागू कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।
धार्मिक संस्थान जनता के विश्वास पर चलते हैं। इसलिए आय, व्यय और संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक करना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के प्रति नैतिक उत्तरदायित्व भी है। पारदर्शिता बढ़ेगी तो विश्वास भी मजबूत होगा और धार्मिक संस्थानों की गरिमा तथा विश्वसनीयता और अधिक बढ़ेगी।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कैंची धाम की आध्यात्मिक और प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए पारदर्शी प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण और सुनियोजित विकास के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
