उत्तराखंड चुनाव 2027: अल्मोड़ा की छह विधानसभा सीटों पर बदल सकते हैं सियासी समीकरण, भाजपा-कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां, पलायन और बेरोजगारी बनेंगे बड़े मुद्दे



127 और 182 वोटों के अंतर से तय हुई थी दो सीटों की जीत-हार, 2027 में पुराने चुनावी आंकड़ों से नहीं बनेगी बात, जनता मांगेगी पांच साल के कामकाज का हिसाब
अल्मोड़ा। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। पहाड़ की राजनीति में अल्मोड़ा जिला इस बार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जिले की छह विधानसभा सीटों द्वाराहाट, सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर, अल्मोड़ा और जागेश्वर पर पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे भले ही अलग-अलग राजनीतिक तस्वीर पेश करते हों, लेकिन 2027 में समीकरण बदलने की पूरी संभावना है।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अल्मोड़ा जिले की छह सीटों में कांग्रेस ने द्वाराहाट और अल्मोड़ा में जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा ने सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर और जागेश्वर सीटों पर कब्जा जमाया था। हालांकि पिछले चुनाव के परिणामों पर गौर करें तो अल्मोड़ा और द्वाराहाट में जीत-हार का अंतर इतना कम था कि कुछ सौ मतों का बदलाव भी चुनावी तस्वीर बदल सकता था।
द्वाराहाट: 182 वोटों की जीत, भाजपा के सामने चुनौती
द्वाराहाट विधानसभा सीट पर 2022 में कांग्रेस के मदन सिंह बिष्ट ने भाजपा के अनिल शाही को महज 182 वोटों से पराजित किया था। मदन सिंह बिष्ट को 17,766 और भाजपा के अनिल शाही को 17,584 वोट मिले थे। उत्तराखंड क्रांति दल के पुष्पेश त्रिपाठी 9,804 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2027 में यहां सड़क, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, बेरोजगारी और पलायन प्रमुख चुनावी मुद्दे बन सकते हैं। क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी भाजपा और कांग्रेस के समीकरण प्रभावित कर सकती है।
सल्ट: ग्रामीण समस्याएं और जंगली जानवरों का आतंक बन सकता है बड़ा मुद्दा
सल्ट विधानसभा सीट पर भाजपा के महेश सिंह जीना ने 2022 में कांग्रेस के रणजीत सिंह रावत को 3,688 मतों से हराया था। भाजपा को 22,393 और कांग्रेस को 18,705 वोट मिले थे। हालांकि 2027 में भाजपा के सामने अपनी जीत दोहराने की चुनौती होगी। इस क्षेत्र में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, रोजगार और पलायन गंभीर समस्याएं हैं। जंगली जानवरों का आतंक किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। बाघ और अन्य वन्यजीवों से ग्रामीणों की सुरक्षा तथा वन विभाग की जवाबदेही भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकती है।
रानीखेत: विकास कार्यों और स्थानीय नेतृत्व की होगी परीक्षा
रानीखेत विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा के प्रमोद नैनवाल ने कांग्रेस के करण माहरा को 2,584 वोटों से हराया था। 2027 में यहां पर्यटन विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, सड़क, रोजगार, सैनिक परिवारों से जुड़े सवाल और स्थानीय व्यापारियों की समस्याएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भाजपा के सामने अपनी पिछली जीत का आधार मजबूत करने की चुनौती होगी, जबकि कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी। मतदाता स्थानीय विधायक के कामकाज और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का मूल्यांकन भी करेंगे।
सोमेश्वर: महिला नेतृत्व, रोजगार और ग्रामीण विकास पर रहेगी नजर
सोमेश्वर सुरक्षित विधानसभा सीट पर भाजपा की रेखा आर्या ने 2022 में जीत दर्ज की थी। इस सीट पर अनुसूचित जाति के मतदाताओं के साथ ग्रामीण क्षेत्रों का चुनावी समीकरण महत्वपूर्ण रहेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, कृषि, महिला सुरक्षा और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा में रहेंगे। पहाड़ के गांवों से लगातार हो रहा पलायन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी भी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनेगी। भाजपा को अपने कार्यकाल का हिसाब देना होगा, जबकि कांग्रेस को मजबूत प्रत्याशी और प्रभावी जनसंपर्क के सहारे मुकाबले में उतरना होगा।
अल्मोड़ा: महज 127 वोटों से तय हुई थी हार-जीत
अल्मोड़ा विधानसभा सीट 2027 के चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबलों में शामिल हो सकती है। 2022 में कांग्रेस के मनोज तिवारी ने भाजपा के कैलाश शर्मा को केवल 127 वोटों से हराया था। कांग्रेस को 24,439 और भाजपा को 24,312 वोट मिले थे। इतनी कम मतों के अंतर से मिली जीत इस सीट को बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। 2027 में नगर की यातायात व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, बंदरों और आवारा पशुओं की समस्या, सड़क, पर्यटन तथा व्यापारियों की परेशानियां प्रमुख मुद्दे बन सकती हैं। दोनों प्रमुख दलों को जनता के बीच अपने कामकाज और भविष्य की योजनाओं का हिसाब रखना होगा।
जागेश्वर: धार्मिक पर्यटन और गांवों के विकास पर होगा चुनावी मुकाबला
जागेश्वर विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा के मोहन सिंह मेहरा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल को 5,883 वोटों से पराजित किया था। भाजपा को 27,530 और कांग्रेस को 21,647 वोट मिले थे। 2027 में जागेश्वर धाम के धार्मिक पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ना, ग्रामीण सड़कों की स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाएं, कृषि, बागवानी और पलायन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे। क्षेत्र के लोगों की अपेक्षा रहेगी कि धार्मिक पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय युवाओं और व्यापारियों तक पहुंचे।
अल्मोड़ा की राजनीति में पलायन सबसे बड़ा सवाल
अल्मोड़ा जिले की छह विधानसभा सीटों का चुनावी विश्लेषण करें तो एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि यहां की राजनीति केवल पार्टी और प्रत्याशी के नाम पर नहीं टिकेगी। पहाड़ के खाली होते गांव, बंद होते स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी, जंगली जानवरों से खेती को नुकसान और युवाओं का महानगरों की ओर पलायन ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे राजनीतिक दलों को जवाब देना होगा।
2027 में भाजपा के सामने जिले की चार सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती होगी, वहीं कांग्रेस दो सीटों से आगे बढ़कर जिले में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश करेगी। उत्तराखंड क्रांति दल जैसे क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी कुछ सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकती है।
क्या बदलेगा 2027 का चुनावी गणित?
अल्मोड़ा की दो विधानसभा सीटों पर 127 और 182 वोटों का अंतर यह बताने के लिए पर्याप्त है कि पहाड़ की राजनीति में मतदाताओं का थोड़ा सा रुख भी बड़ा बदलाव ला सकता है। भाजपा अपने विकास कार्यों के आधार पर जनता के बीच जाएगी तो कांग्रेस सरकार की कमियों और स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बनाएगी। लेकिन दोनों दलों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि उन्होंने पांच वर्षों में पहाड़ के गांवों के लिए क्या किया?
क्या युवाओं को रोजगार मिला? क्या पलायन रुका? क्या अस्पतालों में डॉक्टर पहुंचे? क्या किसानों को जंगली जानवरों से राहत मिली? क्या गांवों तक सड़क और पेयजल की सुविधाएं पहुंचीं?
2027 में अल्मोड़ा की जनता केवल पिछले चुनाव के आंकड़ों को देखकर मतदान नहीं करेगी, बल्कि अपने अनुभव और क्षेत्र में हुए कामकाज के आधार पर फैसला ले सकती है। साफ है कि इस बार अल्मोड़ा की छह विधानसभा सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ कई पुराने राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता भी रखता है।
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