उत्तराखण्ड

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भारी बारिश की चेतावनी: अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। कई राज्यों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो चुका है। वहीं, मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।

परशुराम, भगवान विष्णु के छठवें अवतार हैं, जिन्हें 8 चिरंजीवियों में से भी माना गया है। परशुराम जी का वर्णन रामायण काल से लेकर महाभारत काल में भी मिलता है। आज हम आपको महेंद्रगिरी पर्वत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे परशुराम जी का निवास स्थान माना जाता है।

नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने किच्छा स्थित ‘प्राग फार्म’ भूमि विवाद से जुड़ी एक याचिका खारिज कर दी है। मैसर्स इको फ्रेंडली फूड प्रोसेसिंग पार्क लिमिटेड एवं अन्य की ओर से दायर इस याचिका में राज्य सरकार से 483.2 एकड़ भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल की कटाई की अनुमति देने की मांग की गई थी।

हल्द्वानी। हल्दूचौड़ स्थित मदरसन कंपनी में बीते दिनों हुए हंगामे का लिंक नोएडा में हुए बवाल से जुड़ता दिखाई दे रहा है।

देश

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कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: जहाँ देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्मोड़ा/विशेष संपादकीय रिपोर्ट:उत्तराखंड को देवभूमि यूँ ही नहीं कहा जाता। हिमालय की गोद में बसे…

कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्मोड़ा/जागेश्वर धाम।उत्तराखंड की पावन भूमि को यूँ ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की हर…

अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक निरीक्षण सराहनीय, लेकिन रुद्रपुर के 40 वार्डों में खुलेआम बिक रहा ‘मौत का सामान’ — कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

रुद्रपुर/गदरपुर, 24 अप्रैल 2026।गदरपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा…

नेत्रदान-महादान: ऊषा अनेजा मृत्यु के बाद भी देंगी रोशनी, दो लोगों के जीवन में जलेगा उम्मीद का दीप

गदरपुर की कुंज विहार कॉलोनी से मानवता, संवेदना और समाज सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण…

दुनिया

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भारी बारिश की चेतावनी: अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। कई राज्यों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो चुका है। वहीं, मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।

हल्द्वानी। हल्दूचौड़ स्थित मदरसन कंपनी में बीते दिनों हुए हंगामे का लिंक नोएडा में हुए बवाल से जुड़ता दिखाई दे रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जोरदार वोटिंग हुई। राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम मतदाता भी पूछ रहे हैं कि क्या लग रहा है? यहां एंटी इनकंबेंसी दिखती है और घुसपैठ, वोटर लिस्ट से नाम कटने और रोजगार जैसे मुद्दे भी हैं।

देहरादून से गिरफ्तार तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) से जुड़े संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस विक्रांत कश्यप का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।

Express News

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हल्द्वानी। हल्दूचौड़ स्थित मदरसन कंपनी में बीते दिनों हुए हंगामे का लिंक नोएडा में हुए बवाल से जुड़ता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय खुफिया इकाई व जांच अधिकारी इन संदिग्धों से ठोस इनपुट का इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए पुलिस ने…

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जोरदार वोटिंग हुई। राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम मतदाता भी पूछ रहे हैं कि क्या लग रहा है? यहां एंटी इनकंबेंसी दिखती है और घुसपैठ, वोटर लिस्ट से नाम कटने और रोजगार जैसे मुद्दे भी हैं।

SIR का असर सभी पार्टियों पर है। जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) असहज है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी पूरी…

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देहरादून से गिरफ्तार तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) से जुड़े संदिग्ध पाकिस्तानी जासूस विक्रांत कश्यप का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने इतिहास रच दिया है। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण में 152 सीट पर मतदान हुआ। चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 92.72 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

पर्वतीय जिलों से पढ़ाई के लिए देहरादून में रह रही कुछ युवतियों को गैर हिंदू के लोग अपने जाल में फंसा रहे हैं।

उत्तराखंड के टिहरी जिले में गुरुवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई. चंबा क्षेत्र के चंबा-कोटी सड़क पर नैल के पास एक यूटिलिटी पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर करीब 300 मीटर गहरी खाई में गिर गया.

कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: जहाँ देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्मोड़ा/विशेष संपादकीय रिपोर्ट:उत्तराखंड को देवभूमि यूँ ही नहीं कहा जाता। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य का हर पर्वत, हर नदी, हर वनखंड किसी न किसी आध्यात्मिक कथा का…

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कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्मोड़ा/जागेश्वर धाम।उत्तराखंड की पावन भूमि को यूँ ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की हर घाटी, हर नदी, हर पर्वत किसी न किसी आध्यात्मिक कथा का साक्षी रहा है। इन्हीं…

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अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक निरीक्षण सराहनीय, लेकिन रुद्रपुर के 40 वार्डों में खुलेआम बिक रहा ‘मौत का सामान’ — कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

रुद्रपुर/गदरपुर, 24 अप्रैल 2026।गदरपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाना निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है।…

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नेत्रदान-महादान: ऊषा अनेजा मृत्यु के बाद भी देंगी रोशनी, दो लोगों के जीवन में जलेगा उम्मीद का दीप

गदरपुर की कुंज विहार कॉलोनी से मानवता, संवेदना और समाज सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। स्वर्गीय श्रीमती ऊषा अनेजा के निधन के बाद उनके परिवार ने दुख…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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सल्ट ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने घोषित किए जिला पंचायत प्रत्याशी, दो सीटों पर ओपन चुनाव धीरेंद्र प्रताप की अगुवाई में हुई अहम बैठक, कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता

मरचूला/सल्ट (अल्मोड़ा), 17 जुलाई 2025 उत्तराखंड कांग्रेस ने जिला पंचायत चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों को धार देते हुए आज सल्ट विकास खंड में बड़ी घोषणा की। कांग्रेस के वरिष्ठ […]

पर्वतीय प्रोत्साहन या पहाड़ी पहचान पर खतरा? — उत्तराखंड की नई औद्योगिक नीति बनाम हिमाचल मॉडल

उत्तराखंड सरकार ने मेगा इंडस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति 2025 लागू कर राज्य में निवेश बढ़ाने और पर्वतीय क्षेत्रों को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। […]

सावन महीने का खास महत्व है। यह महीना बेहद पावन होता है। इस महीने में रोजाना देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही सावन सोमवार समेत विशेष शुभ अवसर पर साधक शिव-पार्वती के निमित्त व्रत रखते हैं।

सावन महीने का खास महत्व है। यह महीना बेहद पावन होता है। इस महीने में रोजाना देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही […]

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 16 जुलाई को पहले वनडे में इंग्लैंड के खिलाफ चार विकेट से शानदार जीत दर्ज कर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। इस जीत की नायिका ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा (Deepti Sharma) रहीं।

INDW vs ENGW 1st ODI Highlights: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट से […]

क्रिकेट ने करुण नायर को ‘दूसरा मौका’ दिया, लेकिन वो इंग्‍लैंड दौरे पर इसका अब तक फायदा नहीं उठा सके। नायर तीन टेस्‍ट की छह पारियों में केवल 131 रन बना सके।

पूरी उम्‍मीद है कि मैनचेस्‍टर टेस्‍ट में वो प्‍लेइंग 11 से बाहर बैठ सकते हैं। नायर की आठ साल बाद राष्‍ट्रीय टीम में वापसी हुई, लेकिन 33 साल के बल्‍लेबाज […]

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पिछले पांच वर्ष में विदेश से 134 भगोड़ों की वापसी कराने में सफलता हासिल की है, जो 2010 से 2019 के बीच एक पूरे दशक में स्वदेश भेजे गए लोगों की संख्या से लगभग दोगुनी है।

इंटरपोल के साथ-साथ राज्य और केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों (ED) के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित करते हुए, सीबीआई 2020 से इन 134 भगोड़ों का प्रत्यर्पण या निर्वासन कराने में सफल रही […]

पाकिस्तान में बलूचों का प्रहार: एक और झटका “कागज़ी शेर” फौज को, BLA का दो टूक संदेश – अब और नहीं!

इस्लामाबाद/बलूचिस्तान, जुलाई 2025: पाकिस्तान को एक बार फिर अपनी तथाकथित “बाहुबली” सेना की पोल खुलती दिखी जब बलूचिस्तान में हुए भीषण हमले में पाकिस्तान आर्मी के कम से कम 20 […]

हरेला महापर्व पर जिला प्रशासन ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, डीएम बोले – “एक पौधा मां के नाम”

रुद्रपुर, 17 जुलाई 2025। उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यावरण चेतना का प्रतीक पर्व हरेला इस बार जिले में खास संदेश के साथ मनाया गया। हरेला महापर्व के अवसर पर स्पोर्ट्स […]

धर्मनिरपेक्षता: क्यों केवल हिंदुओं पर लागू!हर-हर महादेव से गूंजा भारत: कांवड़ यात्रा और जागता हुआ हिंदू चेतना! भाजपा और हिंदू पुनर्जागरण लेखक: अवतार सिंह बिष्ट

रुद्रपुर उत्तराखंड,हिन्दू कभी जिन्हें धर्मनिरपेक्षता के नाम पर दबा दिया गया, आज वही हिंदू जाग रहा है, बोल रहा है, और हर-हर महादेव की गूंज के साथ पूरी दुनिया को […]

संपादकीय: उत्तराखंड में उगते ‘ड्रग्स के धंधे’ का अंधेरा – एक चेतावनी,अंडरवर्ल्ड की मौजूदगी: उत्तराखंड अब ‘सॉफ्ट टारगेट’ एक पुकार — अवतार सिंह बिष्ट, वरिष्ठ पत्रकार

रुद्रपुर,उत्तराखंड की शांत वादियों में अब एक ऐसा तूफान पनप रहा है, जो केवल युवाओं के भविष्य को ही नहीं निगल रहा, बल्कि राज्य की साख और सुरक्षा को भी […]