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सवाल यह है कि यदि जमीन भी चली जाए और रोजगार भी न मिले, तो उत्तराखंड के हिस्से में आखिर बचा क्या? सरकार को जवाब देना होगा।

संपादकीय: हमारी जमीन, पर हक किसका?गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर कभी भारत…

शिलान्यास की चमक, संगमरमर की राजनीति और उत्तराखंड के असली सवाल

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है।…

धामी सरकार में टूटे विकास के रिकॉर्ड: कैड़ा, रुद्रपुर को मिली करोड़ों की सौगात

रुद्रपुर। उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने रविवार को अपने प्रथम रुद्रपुर…

अल्मोड़ा का चितई गोलू देवता मंदिर: जहां स्टाम्प पेपर पर लिखी जाती है फरियाद, न्याय के देवता आज भी सुनते हैं हर पुकार

अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र वादियों में स्थित चितई गोलू देवता मंदिर केवल एक धार्मिक…

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अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक निरीक्षण सराहनीय, लेकिन रुद्रपुर के 40 वार्डों में खुलेआम बिक रहा ‘मौत का सामान’ — कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

नेत्रदान-महादान: ऊषा अनेजा मृत्यु के बाद भी देंगी रोशनी, दो लोगों के जीवन में जलेगा उम्मीद का दीप

पतलोट महाविद्यालय में देवभूमि उद्यमिता योजना का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने वर्ष 2026 के बोर्ड परिणाम घोषित करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं.

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कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: जहाँ देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्मोड़ा/विशेष संपादकीय रिपोर्ट:उत्तराखंड को देवभूमि यूँ ही नहीं कहा जाता। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य का हर पर्वत,…

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कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्मोड़ा/जागेश्वर धाम।उत्तराखंड की पावन भूमि को यूँ ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की हर घाटी, हर नदी, हर पर्वत…

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अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक निरीक्षण सराहनीय, लेकिन रुद्रपुर के 40 वार्डों में खुलेआम बिक रहा ‘मौत का सामान’ — कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

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पतलोट महाविद्यालय में देवभूमि उद्यमिता योजना का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने वर्ष 2026 के बोर्ड परिणाम घोषित करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं.

सवाल यह है कि यदि जमीन भी चली जाए और रोजगार भी न मिले, तो उत्तराखंड के हिस्से में आखिर बचा क्या? सरकार को जवाब देना होगा।

संपादकीय: हमारी जमीन, पर हक किसका?गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर कभी भारत की कृषि क्रांति का प्रतीक था। लगभग 16 हजार एकड़ उपजाऊ भूमि पर स्थापित इस…

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शिलान्यास की चमक, संगमरमर की राजनीति और उत्तराखंड के असली सवाल

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सत्ता के गलियारों में राजनीतिक पटकथा लिखी जा चुकी है।…

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धामी सरकार में टूटे विकास के रिकॉर्ड: कैड़ा, रुद्रपुर को मिली करोड़ों की सौगात

रुद्रपुर। उत्तराखंड के शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने रविवार को अपने प्रथम रुद्रपुर दौरे के दौरान नगर निगम क्षेत्र को करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की बड़ी सौगात…

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अल्मोड़ा का चितई गोलू देवता मंदिर: जहां स्टाम्प पेपर पर लिखी जाती है फरियाद, न्याय के देवता आज भी सुनते हैं हर पुकार

अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र वादियों में स्थित चितई गोलू देवता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, न्याय और लोकविश्वास का ऐसा अद्भुत केंद्र है, जिसकी ख्याति देश…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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केद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2025 को आम बजट पेश किया। 5 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी। बजट में वित्त मंत्री ने मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी है।

अब 12 लाख तक की कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा। माना जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान यह बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता […]

Nirmala Sitharaman on Income Tax: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फाइनेंश‍ियल ईयर 2025-26 के बजट में म‍िड‍िल क्‍लास के ल‍िए बड़ी राहत का ऐलान क‍िया है. उन्होंने सैलरीड क्‍लास और मध्यम वर्ग को ध्‍यान में रखते हुए 12 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को पूरी तरह से टैक्‍स फ्री करने की घोषणा की है.

8 से 12 लाख तक की आमदनी पर 10 प्रत‍िशत टैक्‍स प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड) लेक‍िन इस सबके […]

भारत के बजट को देखकर कहीं खुशी कहीं गम है. एक तरफ भारत का मिडिल क्लास मुस्कुरा रहा है. दूसरी तरफ सीमा पार पाकिस्तान की आवाम टैक्स के आंसू रो रही है. भारत के बजट में जिस तरह की राहत लोगों को मिली है.

शहबाज़ सरकार पर पाकिस्तानियों का गुस्सा और बढ़ गया है. कहा जा रहा है शहबाज़ सरकार टैक्स लगाकर पाकिस्तानियों का खून चूस रही है. पाकिस्तानी अब अपने हुक्मरानों को भारत […]

सरकार ने 12 लाख तक की आय पर टैक्स माफ का ऐलान किया है, लेकिन लोगों के मन में इसे लेकर कई सवाल हैं, जैसे अगर किसी की सैलरी 13 लाख है तो उस पर कितना टैक्स लगेगा? इसके साथ ही सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन ये है कि अगर 12 लाख तक की आय पर टैक्स माफ है तो फिर क्या सिर्फ एक लाख पर टैक्स देना होगा?

ईसका जवाब है- नहीं. प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड) लोगों का एक सवाल ये भी है कि अगर सैलरी […]

नए वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड को विकास कार्यों के लिए अधिक बजट मिलेगा। केंद्रीय करों में उत्तराखंड की हिस्सेदारी में नए साल में 1515 करोड़ रुपये का इजाफा होने जा रहा है। वहीं, पूंजीगत मद में ब्याजमुक्त कर्ज की राशि में भी इजाफे का रास्ता भी खुल गया है।

शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट घोषणाओं के बाद राज्य के वित्त अधिकारी और विशेषज्ञ उत्तराखंड के लिए नफे-नुकसान के आकलन में जुट गए हैं। वित्त विभाग के […]

उत्तराखंड के खानपुर में बीते दिनों पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और वर्तमान विधायक उमेश कुमार के बीच विवाद देखने को मिला था. जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए थे.

अब इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किसान नेता राकेश टिकैत कर रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन के नेता ने डैम कोठी स्थित राज्य अतिथि गृह में चैंपियन की पत्नी […]

धीरेंद्र प्रताप ने बजट को गांव किसान और नौजवान विरोधी बताया

उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने बजट को गांव किसान और नौजवान विरोधी बताया है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह से ग्रामीण विकास पर शिक्षा […]

हिंदू धर्म में कई सारे पर्व त्योहार मनाए जाते हैं और सभी का अपना महत्व होता है लेकिन बसंत पंचमी को बहुत ही खास माना जाता है जो कि विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित दिन होता है इस दिन विद्यार्थी ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा करते हैं और व्रत आदि भी रखते हैं

मान्यता है कि ऐसा करने से देवी मां की असीम कृपा बरसती है और शिक्षा के मार्ग पर आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं, इस साल बसंत पंचमी का […]

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, बसंत पचंमी को माता सरस्वती प्रकट हुईं थीं. ये पर्व माता के जन्मदिन के रूप में मानाया जाता है. बसंत पंचमी पर माता सरस्वती का पूजन किया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन विधि-विधान से माता सरस्वती का पूजन करने से बुद्धि ज्ञान के साथ ही सौभाग्य, तरक्की और धन धान्य भी बढ़ता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि साल बसंत पचंमी का पर्व किस दिन मानाया जाएगा. साथ ही बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है. कब मनाई जाएगी बसंत पंचमी ? दरअसल, बंसत पंचमी का पर्व माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 2 फरवरी सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगी. वहीं इस तिथि का समापन 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 54 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व 2 फरवरी को मनाया जाएगा. बसंत पचंमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त वहीं बसंत पंचमी पर माता सरस्वती के पूजन का मुहूर्त 2 फरवरी के दिन सुबह 7 बजकर 9 मिनट पर शुरू हो जाएगा. माता सरस्वती के पूजन का ये मुहूर्त 2 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. इस दिन माता सरस्वती के पूजन के लिए सिर्फ 5 घंटे 26 मिनट का समय मिलेगा. इस दिन रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा. ये दोनों ही योग ज्योतिष में बड़े शुभ माने गए हैं. मान्यता है कि जो इन दोनों योगों में पूजा करता है उसकी हर कामना पूरी होती है. बसंत पंचमी पूजा विधि बसंत पंचमी के दिन स्नान करके पीले, बसंती या सफेद रंग के कपड़े पहनने चाहिए. फिर पूजा स्थल को साफ करके वहां एक चौकी रखकर उसपर पिला कपड़ा बिछाकर उसपर माता की तस्वीर या मूर्ति रखनी चाहिए. इसके बाद मां सरस्वती को श्वेत चंदन पीले और सफेद फूल चढ़ाने चाहिए. माता को मिश्री, दही या केसर की खीर का खीर का प्रसाद चढ़ाना चाहिए. मां सरस्वती के मूल मंत्र ‘ऊं ऐं सरस्वत्यै नम:’ का जाप अवश्य करना चाहिए. जाप के बाद प्रसाद ग्रहण करना चाहिए.

02 फरवरी 2025 दिन रविवार को बसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड) *प्रतिवर्ष माघ माह […]

मोदी सरकार 3.0 का आज पहला पूर्ण बजट है. करीब 1.4 अरब देशवासियों की नजर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman Budget) के पिटारे पर है. सवाल है कि क्या मिडिल क्लास को टैक्स में छूट मिलेगी, क्या सस्ते घर और एजुकेशन का सपना पूरा होगा?

आज इन सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा. जी हां, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी शनिवार (1 फरवरी 2025) को मोदी सरकार के तीसरे टर्म का यूनियन बजट पेश […]