
मृत्युंजय परिहार
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को सम्मान और सेवा का अवसर देने के लिए सरकार जारी करे शासनादेश
रुद्रपुर। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं तो सरकार को उनके लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह मांग उठाते हुए मृत्युंजय ने कहा कि जिन आंदोलनकारियों ने अलग उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए अपना जीवन संघर्षों में खपाया, लाठियां खाईं, जेल गए और राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उन्हें आज भी सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मृत्युंजय ने कहा कि यदि सरकार राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी सेवाओं में समुचित अवसर उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है तो कम से कम त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों और विधानसभा चुनावों में उनके लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के संबंध में शासनादेश जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी और जनसेवा का अवसर मिलना चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स उत्तराखंड उत्तर प्रदेश, संपूर्ण भारत, देश-विदेश, खेल, आध्यात्मिक, राजनीतिक और जन सरोकारों की खबरें।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष केवल अलग राज्य प्राप्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका सपना उत्तराखंड में सम्मान, स्वाभिमान, रोजगार और बेहतर भविष्य की व्यवस्था स्थापित करना भी था। आज जरूरत है कि सरकार उनके योगदान को केवल समारोहों और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों तक सीमित न रखे, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों के लिए ठोस नीतिगत निर्णय ले।
मृत्युंजय परिहार ने कहा कि आंदोलनकारियों और उनके परिवारों ने राज्य निर्माण के लिए जो त्याग किया है, उसे देखते हुए सरकार को उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। यदि सरकारी नौकरी में अवसर नहीं मिल पा रहा है तो जनप्रतिनिधित्व और चुनावी भागीदारी के माध्यम से सेवा का रास्ता खोलने की मांग पर सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के हित में 30 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव पर विचार कर संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि राज्य निर्माण में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों को सम्मान के साथ समाज और प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिल सके।
