ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान, कंगना ने बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने उनके प्रशंसकों को गर्व महसूस कराया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
जॉन अब्राहम से मदद मांगने का किस्साBharat Bhhagya Viddhaata के लिए Kangana Ranaut ने किया था जॉन अब्राहम को फोन, लेकिन क्यों?
कंगना ने बताया कि पहले इस फिल्म का नाम ‘नर्सेस ऑफ कामा’ रखा गया था। लेकिन जब उन्होंने पूरी कहानी सुनी, तो उन्हें इसमें भारत की करुणा और सेवा की भावना इतनी प्रबल लगी कि उन्होंने नाम बदलकर ‘भारत भाग्य विधाता’ रखने का निर्णय लिया। हालांकि, यह नाम पहले से ही जॉन अब्राहम की कंपनी के पास रजिस्टर था।
इस जानकारी के बाद, कंगना ने तुरंत जॉन अब्राहम को फोन किया। उन्होंने कहा, “मैंने जॉन सर को संपर्क किया और उन्होंने केवल एक दिन में यह टाइटल हमारे नाम कर दिया, वो भी बिना किसी शुल्क के। हम उनके इस सहयोग के लिए दिल से आभारी हैं।”
फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ की कहानी
फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ सच्ची घटनाओं पर आधारित है। इसमें एक भयावह रात का चित्रण किया गया है, जब पूरा शहर आतंक के साए में था। उस कठिन समय में कुछ सामान्य लोगों ने मसीहा बनकर लगभग 400 लोगों की जान बचाई। कंगना इस फिल्म में एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं, और कहानी मुख्य रूप से अस्पतालों के नर्सों और वॉर्ड बॉयज के साहस पर केंद्रित है।
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ऐसी ही शख्सियत हैं, जिनका जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी है। इन दिनों उनकी नई फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। फिल्म में देशभक्ति, राष्ट्र गौरव और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण का भाव प्रमुखता से दिखाई देता है, जिसके कारण इसे लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नया उछाल ला सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह कंगना रनौत की लोकप्रियता, उनका प्रभावशाली अभिनय और राष्ट्रवादी विषयों के प्रति उनकी स्पष्ट प्रतिबद्धता मानी जा रही है। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग कंगना को केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि अपने विचारों को निर्भीकता से रखने वाली सार्वजनिक हस्ती के रूप में भी देखता है।
कंगना रनौत का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। हिमाचल प्रदेश के एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने बॉलीवुड तक का सफर तय किया। शुरुआती दिनों में उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना किया। परिवार की अपेक्षाओं और सामाजिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। कम उम्र में ही घर छोड़कर अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली कंगना ने संघर्ष के कई दौर देखे, लेकिन अपने आत्मविश्वास और प्रतिभा के दम पर उन्होंने खुद को स्थापित किया।
फिल्मी करियर की शुरुआत के बाद कंगना ने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उन्होंने ऐसे किरदारों को जीवंत किया जो महिलाओं की शक्ति, आत्मनिर्भरता और संघर्ष को दर्शाते थे। समय के साथ उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और राष्ट्रीय पुरस्कारों सहित अनेक सम्मान प्राप्त किए।
कंगना का व्यक्तित्व हमेशा से बेबाक रहा है। उन्होंने कई सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। यही कारण है कि वे अक्सर चर्चाओं और विवादों के केंद्र में भी रहीं। हालांकि समर्थकों का मानना है कि कंगना ने हमेशा अपने विचारों को बिना किसी दबाव के सामने रखा और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाया।
हाल के वर्षों में कंगना की पहचान केवल एक अभिनेत्री तक सीमित नहीं रही। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। देश, संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर उनकी मुखरता ने उन्हें राजनीतिक मंच तक पहुंचाया। जनता के बीच उनकी लोकप्रियता और प्रभाव को देखते हुए उन्हें चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली और वे संसद तक पहुंचीं। सांसद बनने के बाद भी कंगना लगातार जनसरोकारों और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी बात रखती रही हैं।
उनकी नई फिल्म को भी उनके इसी व्यक्तित्व का विस्तार माना जा रहा है। फिल्म में देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव, बलिदान और कर्तव्य जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। दर्शकों को फिल्म में भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ प्रेरणा का संदेश भी देखने को मिलता है। यही कारण है कि फिल्म रिलीज से पहले ही चर्चा का विषय बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में ऐसी फिल्मों की मांग बढ़ी है जो केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक संदेश भी दें। कंगना की यह फिल्म उसी श्रेणी में देखी जा रही है। फिल्म के संवाद, कहानी और प्रस्तुति में देश के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना दिखाई देती है, जो दर्शकों को आकर्षित कर रही है।
कई दर्शकों का मानना है कि कंगना का व्यक्तिगत जीवन और उनकी विचारधारा भी इस फिल्म को विशेष बनाती है। संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। एक साधारण परिवार की बेटी का राष्ट्रीय स्तर की अभिनेत्री और फिर सांसद बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यही कारण है कि लोग उनकी फिल्मों को केवल मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि उनके जीवन दर्शन के प्रतिबिंब के रूप में भी देखते हैं।
फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि दर्शकों का शुरुआती उत्साह इसी तरह बना रहा तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकती है। देशभक्ति से जुड़े विषयों पर आधारित फिल्मों को हमेशा से भारतीय दर्शकों का समर्थन मिलता रहा है और कंगना की मजबूत स्क्रीन उपस्थिति इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।
फिल्मी पर्दे से संसद तक का कंगना रनौत का सफर यह साबित करता है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज वे भारतीय सिनेमा और सार्वजनिक जीवन दोनों में एक प्रभावशाली नाम हैं। उनकी नई फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं, बल्कि उनके संघर्ष, विचार और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का भी प्रतीक बनकर उभर रही है। यही वजह है कि दर्शकों और समर्थकों को इस फिल्म से बड़ी उम्मीदें हैं और इसे वर्ष की चर्चित फिल्मों में से एक माना जा रहा है।
