हुकुम सिंह कुंवर के नेतृत्व से जगी नई उम्मीद, अब राज्य आंदोलनकारियों की अधूरी मांगों पर फैसले का इंतजार,

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हुकुम सिंह कुंवर के नेतृत्व से बढ़ीं उम्मीदें, अब राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों पर फैसले की बारी
स्वागत और सम्मान के बीच बड़ा सवाल: क्या राज्य आंदोलनकारियों को मिलेगा हक, जिसके लिए उन्होंने संघर्ष किया था?



उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियो के सपने को साकार करने के लिए वर्तमान में दो उपाध्यक्ष श्री सुभाष बड़थ्वाल और श्रीमती चारु कोठारी (चारू माथुर कोठारी) हैं। इस परिषद में अध्यक्ष पद का दायित्व श्री हुकम सिंह कुंवर के पास है। इन्हीं संघर्षशील चेहरों में एक प्रमुख नाम उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के संस्थापक हुकुम सिंह कुंवर का भी रहा है। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami द्वारा उन्हें उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद का अध्यक्ष (दर्जा मंत्री) नियुक्त किया जाना न केवल व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि राज्य आंदोलन से जुड़े हजारों सेनानियों के संघर्ष को भी सम्मान देने वाला निर्णय माना जा रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


नियुक्ति के बाद जिस प्रकार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आंदोलनकारियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने हुकुम सिंह कुंवर को बधाई दी, वह उनके व्यापक जनसंपर्क और सामाजिक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
स्वागत का लंबा सिलसिला
कुमाऊं से लेकर देहरादून तक बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। चंपावत जनपद के सीमांत क्षेत्र पासम से कमल सिंह बोरा, सुल्ला से सूरज सामंत अपने साथियों के साथ पहुंचे और शुभकामनाएं दीं। हज कमेटी की सदस्य तरुम्म खान ने भी बधाई देकर नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
भाजपा जिलामंत्री प्रताप सिंह रैकवाल, भाजपा नेता हृदयेश कश्यप, जीवन कार्की, कैलाश जोशी, प्रकाश रावत, चंदन सिंह बिष्ट, किसान आयोग के सदस्य चतुर सिंह बोरा, गोपाल भट्ट, हरीश रावत, संजय बिष्ट, एल.के. पांडेय, अनुराग वर्मा सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तित्वों ने उनके आवास पहुंचकर सम्मान व्यक्त किया।
काशीपुर, कालाढूंगी, अल्मोड़ा, चंपावत और देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने यह संदेश दिया कि राज्य आंदोलन की भावना आज भी समाज में जीवित है और आंदोलनकारियों के प्रति सम्मान का भाव कायम है।
देहरादून स्थित शहीद स्मारक में हुकुम सिंह कुंवर ने राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल सम्मान समारोहों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी।
परिषद में नई टीम, नई उम्मीद
सरकार ने परिषद के अध्यक्ष के रूप में हुकुम सिंह कुंवर की नियुक्ति की है। उपाध्यक्ष श्री सुभाष बड़थ्वाल और श्रीमती चारु कोठारी (चारू माथुर कोठारी) ।को भी दर्जा मंत्री का दायित्व दिया गया है। राज्य आंदोलनकारी समुदाय इस नई टीम से बड़ी अपेक्षाएं रखता है।
कारण भी स्पष्ट है। वर्षों से आंदोलनकारियों की अनेक मांगें शासन और प्रशासन के गलियारों में लंबित हैं। समय-समय पर आश्वासन मिले, समितियां बनीं, घोषणाएं हुईं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम अभी भी दिखाई नहीं दिए।
अब असली परीक्षा शुरू
हुकुम सिंह कुंवर को जिस गर्मजोशी से बधाइयां मिली हैं, उससे कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी अब उनके सामने है। राज्य आंदोलनकारियों का मानना है कि परिषद केवल सम्मान का मंच न बने, बल्कि उनके अधिकारों की आवाज बनने वाली संस्था साबित हो।
आज भी हजारों आंदोलनकारी और उनके परिवार कई बुनियादी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सबसे प्रमुख मांग है कि राज्य आंदोलनकारियों को न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह सम्मान पेंशन प्रदान की जाए। वर्तमान व्यवस्था को लेकर लगातार असंतोष व्यक्त किया जाता रहा है। महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों में आंदोलनकारियों का कहना है कि सम्मानजनक जीवन के लिए पेंशन राशि बढ़ाई जानी चाहिए।
10 प्रतिशत आरक्षण का सवाल
राज्य आंदोलन के दौरान बार-बार यह वादा किया गया कि आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को विशेष अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। लेकिन आज भी 10 प्रतिशत आरक्षण को लेकर स्पष्ट और प्रभावी नीति सामने नहीं आ सकी है।
क्या यह आरक्षण शिक्षा में होगा?
क्या यह सरकारी नौकरियों में लागू होगा?
क्या इसके लिए अलग नियमावली बनेगी?
क्या आश्रितों को इसका लाभ मिलेगा?
ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर आज भी आंदोलनकारी समुदाय तलाश रहा है।
गेस्ट हाउस सुविधा पर स्पष्टता जरूरी
राज्य आंदोलनकारियों के लिए गेस्ट हाउस सुविधा की बात वर्षों से होती रही है, लेकिन इसका स्वरूप आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
क्या राज्य के सभी सर्किट हाउस और गेस्ट हाउस में उन्हें निःशुल्क या रियायती सुविधा मिलेगी?
क्या यह सुविधा उनके आश्रितों को भी प्राप्त होगी?
क्या इसके लिए अलग पहचान पत्र जारी किए जाएंगे?
इन सवालों का समाधान अभी बाकी है।
आश्रितों के अधिकार भी महत्वपूर्ण
उत्तराखंड आंदोलन केवल एक पीढ़ी का संघर्ष नहीं था। अनेक परिवारों ने अपने घरों के सदस्य खोए, आर्थिक नुकसान झेला और सामाजिक चुनौतियों का सामना किया।
इसलिए आंदोलनकारी संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि जिन सुविधाओं का लाभ राज्य आंदोलनकारियों को मिलता है, उनका लाभ उनके आश्रितों को भी सुनिश्चित किया जाए।
विशेष रूप से:
शिक्षा में प्राथमिकता,
छात्रवृत्ति योजनाएं,
रोजगार के अवसर,
चिकित्सा सुविधाएं,
सामाजिक सुरक्षा योजनाएं,
जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ आंदोलनकारियों ने परिषद के समक्ष विभिन्न मांगें रखी हैं। इनमें पेंशन वृद्धि, आरक्षण व्यवस्था, आश्रितों के अधिकार, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, सम्मानजनक पहचान और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण जैसे विषय प्रमुख हैं।
इन मांगों पर परिषद यदि ठोस कार्ययोजना बनाती है तो यह आंदोलनकारियों के विश्वास को मजबूत करेगी।
केवल सम्मान नहीं, समाधान भी चाहिए
यह सच है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलनकारियों को प्रतिनिधित्व देकर सकारात्मक संदेश दिया है। हुकुम सिंह कुंवर और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति को अधिकांश आंदोलनकारी स्वागतयोग्य कदम मान रहे हैं।
लेकिन अब प्रश्न यह है कि क्या परिषद केवल औपचारिक संस्था बनकर रह जाएगी या वास्तव में राज्य आंदोलनकारियों के अधिकारों और समस्याओं के समाधान का प्रभावी मंच बनेगी?
सरकार के लिए अवसर
धामी सरकार के पास एक महत्वपूर्ण अवसर है। यदि राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों पर समयबद्ध निर्णय लिए जाते हैं तो यह उत्तराखंड आंदोलन की मूल भावना के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राज्य निर्माण के 26 वर्ष बाद भी यदि आंदोलनकारी अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं, तो यह स्थिति चिंतन का विषय है। अब समय आ गया है कि घोषणाओं और आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस निर्णय लिए जाएं।
हुकुम सिंह कुंवर का उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद का अध्यक्ष बनना निश्चित रूप से राज्य आंदोलनकारियों के लिए सम्मान और उम्मीद का क्षण है। प्रदेशभर से मिले स्वागत और समर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलनकारी समाज उनसे बड़ी अपेक्षाएं रखता है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर, उपाध्यक्ष हरीश पांडेय एवं परिषद की पूरी टीम राज्य आंदोलनकारियों की वर्षों पुरानी मांगों को सरकार तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचाती है और उनके समाधान की दिशा में कितनी तेजी से काम करती है।
राज्य आंदोलन के शहीदों और संघर्षशील सेनानियों के सपनों का सम्मान तभी पूरा माना जाएगा, जब सम्मान के साथ-साथ उनके अधिकारों और मांगों का भी स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा।


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