

डाट काली मंदिर आकर पूजा करने वाले मोदी इंदिरा गांधी के बाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने हैं। पीएम ने डाटकाली मंदिर में मां काली की पूजा से बंगाल तक भावनात्मक संदेश दिया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
प्रधानमंत्री मोदी का मंदिर आगमन प्रातः 11:30 बजे होना था। परंतु उनका काफिला 12:10 पर मंदिर पहुंचा। मंदिर के महंत के पुत्र शुभम गोस्वामी ने मंदिर में उनका स्वागत किया, संयम गोस्वामी ने मंदिर के इतिहास के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी दी। आचार्य विजेंद्र थपलियाल ने प्रधानमंत्री को संकल्प करा कर पूजा अर्चना कराई। पूजा अर्चना में उन्होंने विश्व शांति और देश के विकास का संकल्प लिया। पूजन के उपरांत प्रधानमंत्री मंदिर के महंत रमन प्रसाद गोस्वामी एवं माता हेमलता गोस्वामी से मिले और उनका हालचाल जाना। महंत रमन गोस्वामी एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।
महंत और पीएम मोदी में बात हुई, करीब 25 मिनट मंदिर में रहे
प्रधानमंत्री ने महंत से कहा कि वह अपना ध्यान रखें। कहा कि मंदिर में आकर उन्हें एक आध्यात्मिक शांति एवं अद्भुत शक्ति का एहसास हुआ है। वह मंदिर में बिताए क्षण हमेशा याद रखेंगे। मंदिर में उनके साथ प्रधानमंत्री ने करीब 25 मिनट बिताए। मंदिर प्रागंण में स्कूली छात्रों के संस्कृत श्लोक से जुड़ी प्रस्तुति को भी मोदी ने सुना। मंदिर सेवादार गौरव कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ एंव उत्तर प्रदेश के उप मुख्य मंत्री केशव प्रकाश मौर्य भी उपस्थित रहे।
डाट काली मंदिर आने वाले दूसरे पीएम
मंदिर महंत के पुत्र संयम गोस्वामी ने बताया कि डाट काली मंदिर आकर पूजा करने वाले मोदी देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने हैं। इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी डाट काली मंदिर में पूजा अर्चना की थी। हालांकि इस बात का कोई रिकॉर्ड मंदिर में उपलब्ध नहीं है। लेकिन उन्होंने अपनी दादी से इंदिरा गांधी का जिक्र कई बार सुना है।
दून की रक्षक हैं मां डाट काली
यूपी-देहरादून सीमा पर स्थित मां डाटकाली का मंदिर न केवल आध्यात्मिक बल्कि ऐतहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां डाटकाली को देहरादून समेत इस पूरे क्षेत्र का रक्षक माना जाता है। इस क्षेत्र में जब भी कोई नया वाहन खरीदता है तो वो मां डाटकाली का आशीर्वाद लेने अवश्य जाता है। मान्यता है कि मंदिर में पूजा अर्चना और चुनरी का बांधने से वाहन और वाहन स्वामी सड़क हादसों से सुरक्षित रहता है। मान्यता के अनुसार सौ वर्ष पहले यहां अखंड जोत जगाई गई थी। जो कि आज भी अनवरत रूप से प्रज्ज्वलित है।
1804 में स्थापित हुआ था मंदिर
डाटकाली मंदिर की स्थापना देश में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान हुई थी। बात 1804 की है। स्थानीय लोगों के अनुसार उस दौरान अंग्रेज हुकूमत देहरादून-सहारनपुर तक सड़क का निर्माण कर रही थी। डाट मंदिर के पास आकर उनका यह निर्माण कार्य थम गया। यहां ठोस पहाड़ियां होने की वजह से काम बार बार बाधित हो रहा था। मान्यता है कि तब मां काली ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर के सपने में आकर बताया कि वहां उनका पिंडी रूप दबा है। इसके बाद देवी के पिंडी रूप को 30 जून आषाढ़ नवरात्रि में मंदिर की स्थापना की गई। तब जाकर यहां काम निर्बाध रूप से हुआ।
पूजा से कोलकाता तक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को न केवल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे का लोकार्पण किया, बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रतीकों के रूप में कई अहम संदेश भी दिए। जहां उत्तराखंड में वो भाजपा के हैट्रिक अभियान को नई ऊर्जा दे गए। वहीं, डाटकाली मंदिर में मां काली की पूजा, और गढ़ी कैंट जनसभा में गोर्खाली में अभिवादन के साथ बंगाल के साथ भावनात्मक कनेक्ट किया। प्रधानमंत्री के दौरे की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां, नारी वंदन अधिनियम लाने के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होने जा रहा है। वहीं, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 23 और 29 अप्रैल को दो चरण में मतदान होना है।
मालूम हो कि, आम बंगाली मानस में शक्ति का अवतार देवी दुर्गा और देवी महाकाली आस्था और संस्कृति की पर्याय हैं। प्रधानमंत्री का दून में मां महाकाली के रूप डाटकाली मंदिर में पूजन करना उनकी धार्मिक आस्था तो था ही। साथ ही इसे बंगाल के मतदाताओं तक एक सांस्कृतिक और भावनात्मक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा गया है। इससे पहले भी समय समय पर प्रधानमंत्री सनातनी आस्था के प्रतीकों के साथ देश के हर क्षेत्र से भावनात्मक रिश्ता जोड़ते रहे हैं।
गोर्खाली में अभिवादन कर बंगाल से कनेक्ट किया
बंगाल से कनेक्ट करने का उनका अगला कदम गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड में आयोजित जनसभा में गोर्खाली में अभिवादन करना भी रहा। यहां उन्होंने गढ़वाली के साथ ही गोर्खाली में भी लोगों का अभिवादन किया। गढ़वाली में उद्बोधन के बाद मोदी ने जैसे ही कहा कि ‘मेरो प्यारो दाजी, भाई, दीदी, बहिनी, आमा, बाबा सबाई लाई मेरो तरफ से ढोक दिन छु’ सारा पंडाल तालियोंं से गूंज उठा। यह एक तरह से उनका उत्तराखंड के स्थानीय के साथ ही पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग समेत एक बड़े इलाके में रहने वाले गोर्खालियों के साथ तक भी कनेक्ट के रूप में भी देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में गोर्खालियों की अच्छी खासी संख्या है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में पेश करने की तैयारी के बीच यह दौरा महिलाओं को साधने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मां काली की पूजा अर्चना करते हुए नारी शक्ति के सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बाखूबी जाहिर किया।




