उत्तराखंड में बारिश का कहर: पौड़ी में मकान ध्वस्त, चमोली सुरंग हादसे में मृतकों की संख्या नौ पहुंची, ओम पर्वत की धुंधली पड़ती आकृति ने बढ़ाई चिंता, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज से दो दिवसीय दौरे पर

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उत्तराखंड रुद्रपुर देहरादून, 18 अगस्त। उत्तराखंड में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भूस्खलन से अनेक सड़कें बंद हो गई हैं, नदियां और गदेरे उफान पर हैं तथा कई स्थानों पर मकानों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। इस बीच, चमोली जिले में सुरंग हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है, जबकि पिथौरागढ़ स्थित प्रसिद्ध ओम पर्वत की बदलती तस्वीर ने पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 19 और 20 अगस्त को उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


मौसम विभाग ने मंगलवार को देहरादून, टिहरी, पौड़ी और ऊधम सिंह नगर जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा, अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
पौड़ी में मकान पर गिरा मलबा, तीन लोगों के दबने की आशंका
पौड़ी जिले के सतपुली क्षेत्र में सोमवार रात से लगातार हो रही बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गुमखाल के निकट मेहरगांव में एक मकान के ऊपर भारी मात्रा में मलबा गिरने से मकान पूरी तरह धराशायी हो गया। हादसे में तीन लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है।
घटना के बाद राहत एवं बचाव दल को तत्काल मौके पर भेजा गया। एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू कर दिया है। वहीं, बैरगांव क्षेत्र में भी एक महिला का मकान मलबे की चपेट में आने की सूचना मिली है।
नगर पंचायत सतपुली क्षेत्र के कई इलाकों में मलबा जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार स्थिति का आकलन कर रहा है।
हरिद्वार में गंगा चेतावनी स्तर के करीब
लगातार हो रही बारिश का असर हरिद्वार में भी दिखाई दे रहा है। गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और यह चेतावनी स्तर के काफी करीब पहुंच गया है। प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग लगातार जलस्तर की समीक्षा कर रहा है।
देहरादून में 47.65 मिमी बारिश, सात सड़कें बंद
देहरादून जिले में सोमवार रात से मंगलवार सुबह नौ बजे तक औसतन 47.65 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण जिले के सात ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हो गए हैं।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को जलभराव की 50 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। प्रशासन ने संबंधित विभागों को बंद सड़कों को जल्द खोलने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, नदी और नालों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
टपकेश्वर के पास विकराल हुई तमसा नदी
देहरादून स्थित पौराणिक टपकेश्वर महादेव मंदिर के पास बहने वाली तमसा नदी ने मंगलवार को अचानक विकराल रूप धारण कर लिया। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर, संतोषी माता मंदिर और आर्मी क्षेत्र को जोड़ने वाला मार्ग लगभग एक घंटे तक बाधित रहा।
माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर के संस्थापक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने बताया कि अचानक जलस्तर बढ़ने से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि, बाद में नदी का जलस्तर कम होने पर आवागमन सामान्य हो गया।
चमोली सुरंग हादसे में मृतकों की संख्या नौ हुई
चमोली जिले के पीपलकोटी में 13 अगस्त को हुए सुरंग हादसे में लापता श्रमिकों में से एक का शव मंगलवार को बरामद कर लिया गया। इसके साथ ही हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है, जबकि एक अन्य श्रमिक अभी भी लापता है।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एन.के. जोशी ने बताया कि लापता श्रमिक की तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। सुरंग के भीतर दलदल और भारी मात्रा में जमा मलबे के बावजूद बचाव कार्य जारी है।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई हैं। सुरंग के भीतर जमा कीचड़ और मलबे को हटाने के लिए सक्शन पंप और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
जिला सूचना अधिकारी धीरज कार्की ने बताया कि सुरंग के भीतर फंसी पांच जेसीबी मशीनों में से तीन को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी दो मशीनों को निकालने का प्रयास जारी है।
तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की सुरंग में पानी और मलबे का रिसाव
चमोली जिले में एनटीपीसी की 520 मेगावाट की तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। परियोजना की मुख्य सुरंग में 15 अगस्त को एक कैविटी बनने के बाद पानी और मलबे का रिसाव शुरू हो गया।
एनटीपीसी के अधिकारियों के अनुसार, सुरंग निर्माण के दौरान इस प्रकार की घटनाएं सामान्य मानी जाती हैं। हालांकि, एहतियात के तौर पर सभी श्रमिकों को तत्काल बाहर निकाल लिया गया और निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
तकनीकी विशेषज्ञों की टीम कैविटी को भरने के कार्य में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में ऋषिगंगा आपदा के दौरान इस परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद निर्माण कार्य लंबे समय तक बंद रहा था।
ओम पर्वत की धुंधली पड़ती आकृति ने बढ़ाई पर्यावरणीय चिंता
पिथौरागढ़ स्थित प्रसिद्ध ओम पर्वत एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिसके कारण प्राकृतिक रूप से बनने वाली ‘ॐ’ की आकृति पहले की तुलना में काफी धुंधली दिखाई दे रही है।
वर्ष 2024 में भी कुछ समय के लिए ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी, जब बर्फ लगभग समाप्त हो जाने के कारण यह आकृति दिखाई देना बंद हो गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम बर्फबारी, बढ़ते तापमान, वाहनों से होने वाला प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे कारक हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित कर रहे हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो हिमालय की कई प्राकृतिक और धार्मिक धरोहरें प्रभावित हो सकती हैं।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन आज से उत्तराखंड दौरे पर
इन सभी घटनाओं के बीच उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 19 और 20 अगस्त को उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे।
उपराष्ट्रपति 19 अगस्त को देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में भारतीय वन सेवा के 2025-27 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करेंगे और उनसे संवाद भी करेंगे।
इसके बाद 20 अगस्त को वह मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में वर्ष 2024 बैच के आईएएस अधिकारियों के व्यावसायिक पाठ्यक्रम के दूसरे चरण के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
प्रदेश में एक ओर मौसम की मार से जनजीवन प्रभावित है, तो दूसरी ओर प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और विभिन्न विभाग हालात को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आने वाले 24 घंटे प्रदेश के कई जिलों के लिए चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।


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